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Wednesday, 2 September 2015

दो कूबड़ वाले ऊंट

कहावत है कि ऊंट रे ऊंट तेरी कौन सी कल सीधी ? इन  दो कूबड़ वाले ऊंटों को देख कर लगता है कि ये कहावत बिलकुल सही है ! भारत में ये दो कुब्बे ऊंट केवल लद्दाख की नुब्रा घाटी में ही पाए जाते हैं. वैसे भी दुनिया में दो कुब्बे ऊंट कम ही स्थानों पर पाए जाते हैं और ये सभी स्थान ठन्डे रेगिस्तान हैं - गोबी मरुस्थल मंगोलिया, अल्ताई पहाड़ियां रूस और तक्लामाकन मरुस्थल चीन. इन ऊँटों की संख्या घटती जा रही है और ये प्रजाति लुप्त होने के कगार पर है.

दो कुब्बे ऊंट को जीव विज्ञान में camelus bactrianus कहते हैं और आम भाषा में बैक्ट्रियन ऊंट कहते हैं. यह लगभग 40 - 50 साल तक जीता है. वयस्क ऊंट की कूबड़ तक की ऊंचाई दो मीटर से ऊपर भी जा सकती है. सिर्फ कूबड़ ही 30 इंच तक का हो जाता है. इसका वजन सात सौ से लेकर एक हजार किलो तक हो सकता है. रेगिस्तान का ये जहाज 60 - 65 किमी प्रति घंटे की दौड़ भी लगा लेता है. सामान्यत: इस की चाल 30 - 35 किमी प्रति घंटे की रहती है.

नुब्रा घाटी लगभग 10,000 फीट की ऊंचाई पर लद्दाख में स्थित है. घाटी में पहुँचाने के लिए लेह से खार्दुन्ग-ला होते हुए जाया जा सकता है. घाटी के मुख्य स्थान या बड़े गाँव हैं डिस्किट और हुन्डर. डिस्किट लेह से 150 किमी दूरी पर है. यहाँ शयोक नदी और नुब्रा नदी की घाटियाँ हैं. हुन्डर के आस पास रेत के बड़े बड़े टीले हैं. घाटी में नदी के किनारों पर हरियाली है जहां ये दो कुब्बे ऊंट चरते हुए देखे जा सकते हैं.

कुछ तस्वीरें मुकुल वर्धन के सौजन्य से :

दो कूबड़ वाले ऊंट 

दो कुब्बे ऊँट सवारी बैठाने के लिए तैयार 

एक कूबड़ हो या दो, इंसान सवारी के लिए हमेशा तैयार है

नुब्रा घाटी, लद्दाख 



Monday, 31 August 2015

साहब का ड्राईवर

साहब के टेबल पर डाक रख दी गई थी. साहब एक एक लिफाफा उठाते, आगे पीछे पलट कर देखते, फिर लकड़ी के चाकू से लिफाफा खोलते और चिठ्ठी पर कुछ नोटिंग लिख देते थे. लिफाफे ख़त्म हुए तो फिर नंबर आया एक मैगज़ीन का. मैगज़ीन के पन्ने उलटे पलटे कुछ फोटो देखीं और घंटी बजा दी.
- जी साब ?
- ड्राईवर को भेजो.
ड्राईवर आया.
- जी साब ?
- ये मैगज़ीन घर पर दे आओ.
चालीस मिनट बाद ड्राईवर फिर आया.
- जी साब मैगज़ीन दे आया. मेम साब ने ये पर्ची दी है.
साहब ने पर्ची पढ़ी और पांच सौ का नोट निकाल  कर दिया.
- जाओ सामान ले लो और घर पर दे आओ.

साहब से आपका परिचय करा दूं ? गोयल साब हमारे रीजनल मैनेजर हैं. पूरे का पूरा झुमरी तल्लैय्या का इलाका इनके अंडर आता है. बड़े हाकिम हैं दस करोड़ का लोन तो चुटकी बजाते ही कर देते हैं. इसीलिए तो बैंक से कार मिली हुई है और साथ में ड्राईवर भी मिला हुआ है. लगभग 58 साल की उमर, सांवला रंग और मटके सा पेट. बियर के शौक़ीन हैं शायद इसलिए पेट मटकाकार हो गया है. सिर के बाल उड़ चुके हैं केवल किनारे किनारे एक झालर बची हुई है. उस झालर पर कभी-कभी कलर कर लेते हैं और दिन में सात आठ बार कंघी फेर लेते हैं. प्यार से उन्हें कुछ लोग टकला कह देते हैं कुछ गोलू भी कह देते हैं. पर ये प्यार मोहब्बत की बात आप अपने तक ही रखें क्यूंकि बॉस तो बॉस ही होता है क्या पता कब भड़क जाए.

आप का परिचय साहब के ड्राईवर तेजबीर सिंह उर्फ़ तेजू से भी करा दिया जाए ? आप नोट कर लें बड़े साहब लोगों का ड्राईवर भी बड़ा माना जाता है और उसे ड्राईवर साब कहा जाता है. तेजू पास के गाँव से साइकिल पर साब के घर आता है गाड़ी साफ़ करता है और मेम साब के हाथ की चाय पीता और फिर साब का बस्ता संभाल कर उन्हें ऑफिस ले आता है. बाकी छोटे मोटे काम तो ड्राईवर करते रहते हैं.
एक दिन उसे बुलाया.
- ड्राईवर साब कभी हमारे साथ भी चाय पी लो या फिर मेम साब के हाथ की ही पीनी है ?
- हें हें हें हम तो सेवक हैं साब जी आपके साथ भी पी लेंगे.
- आज साहब का मूड ठीक नहीं है क्या बात है?
- ठीक कहाँ से होगा जी. रात नई फैक्ट्री में गए थे वहां से ताज में डिनर हुआ जी. घर तो वापस पहुंचे 11बजे जी और मैं तो पहुँचा 12 बजे जी.
- ओहो बड़े साहब हैं बड़े होटल में डिनर करेंगे ढाबे में थोड़े ही जाएँगे.
- वो तो ठीक जी पर साब एक आधा पेग ज्यादा मार गए जी. सुबह मेम साब को बोले निम्बु पानी बना दे. बस डांट पड़ गई जी.
- क्या बोल दिया ?
- यूँ कह दिया जी की पेट कहीं जा रहा, वेट कहीं जा रहा पर पीनी जरूर है जाने कब अक्कल आएगी.

सोमवार को तेजू को फिर बुलाया.
- ड्राईवर साहब कई दिन बाद नजर आये हो. ये लो चाय पियो .
- साब जी हम तो सेवक हैं जी. हम तो आपका भी सेवा करेंगे जी.
- आज तो साहब खुश हैं क्यों ? साब को डांट वांट तो नहीं पड़ रही न आजकल ?
- ना जी. बल्कि कल ही तो डिनर हुआ नई फैक्ट्री वाले के यहाँ. काफी सारे डब्बे मिले जी कल तो. एक डिब्बा तो जेवर का था जी वो तो मेम साब खुदी पकड़ें रहीं जी पूरे रस्ते. बाकी मिठाई विठाई होगी जी.
- ड्राईवर साब आपको भी कुछ मिला या नहीं.
- हमें तो पैंट कमीज़ मिली जी.

लैला प्यारी लैला का पिल्ला प्यारा ! मतलब साहब का ध्यान रखना है तो ड्राईवर साहब को चाय जरूर पिलाते रहें.

हमारे ड्राईवर साहब