हमारे मित्र गोयल सा आजकल कुछ अनमने से नज़र आते हैं। हमारी सीनियर्स की हर महीने होने वाली पार्टी में नहीं आए, जबकि बाद में पता लगा वे उस दिन घर पर ही थे। पार्क में सैर करते नज़र आए पर कन्नी काट कर दूसरे गेट से निकल गए और बात ही नहीं हुई। जरूर कोई गड़बड़ है।
हमारे ये मित्र झुमरी तल्लैय्या बैंक से दस साल पहले बतौर जनरल मैनेजर रिटायर हो चुके हैं। सिर के बाल उड़ चुके हैं पर पांच सात सफ़ेद बालों का गुच्छा अभी मौजूद है। इन पांच सात बालों को हमारे साब ने बड़े जतन से संभाल कर रखा हुआ है। पंखे की हवा में जब भी ये लहराते हैं तो उन्हें अपनी जवानी याद आ जाती है! आँखों पर मोटा चश्मा है और शरीर गोल मटोल है - बियर के शौक़ीन रहे हैं अपने जमाने में।
सोचा चलो मिल कर हालचाल पूछ लेते हैं। मिलने पहुँच गए।
भाभी जी चाय ले आई और साथ में एक शिकायत भी कर दी,
- आजकल आप के दोस्त आप से नाराज़ हैं। आप ने इन्हें मीटिंग में नहीं बुलाया ?
- बस इतनी सी बात? नाराज़गी दूर कर देते हैं साब की।
- करिये करिये। सैर का टाइम हो गया है मैं तो पार्क में जा रही हूँ, कह कर भाभी तो चली गई।
- अरे यार गोयल सा ये क्या है? तीन बार फोन किया आपको, दो बार मैंने और एक बार कपूर ने, और भाभी कह रही है की इन्हें बुलाया नहीं। क्या चक्कर है ये ?
- हाँ भाई हाँ, आपकी तरफ से तीन फोन आए थे। कोई नाराज़गी नहीं है। सच बताऊँ ? मैंने ही संध्या से कह दिया था कि फोन नहीं आया इसलिए मैं मीटिंग में नहीं जा रहा हूँ। दरअसल पिछले हफ्ते देहरादून के एक दोस्त को फोन किया तो जवाब मिला की उनका स्वर्गवास हो गया है। कभी कभी उसके साथ बैठक हो जाती थी। बस वो फोन की वजह से मन उदास हो गया था। भई रात भर नींद नहीं आई। सुबह देर से उठा तो फोन की बात तो भूल चुका था। ब्रश कर रहा था तो अचानक फिर से फोन याद आ गया - "ओह ग्रोवर तो सोये सोये ही चला गया!" मुझे तो भाई घबराहट हो गई। संध्या को तो कुछ नहीं बताया पर मन भारी हो गया। तीन चार दिन से किसी से बात नहीं की। संध्या भी बार बार पूछे जा रही है और उसके बार बार पूछने से मेरी चिढ़ भी बढ़ती जा रही है।
- अरे यार गोयल साब जाने भी दो, जाने वाले को किसने रोका है। हम और आप भी किसी दिन इसी तरह निकल लेंगे। लेकिन हाँ मन में इस बात को सोच कर भय तो आ जाता है कि हम कब और कैसे जाएंगे। ना ऊपर जाने की तारीख पता है ना ही ऊपर जाने का तरीका पता है। इस असमंजस से भी तो भय लगता है क्यूं गोयल साब?
- हूँ, बात तो ठीक है।
- इस भय को दूर करने का एक शार्ट - टर्म इलाज तो है मेरे पास।
- वो क्या ?
- बस एक-एक पेग लगा लेते हैं !
- हाहाहा ! बड़ा अच्छा लगा आप का शार्ट - टर्म आईडिया। रम भुलाए गम। सही समय पर आये हो, संध्या भी आधे घंटे तक नहीं आएगी। पेग तो स्टॉक में है नहीं क्यूंकि मालकिन के आदेशानुसार अब मैं रखता ही नहीं। ना ही अब दारु सूट करती है। हाँ अगर आप चाहो तो बियर जरूर मिलेगी ? ओके ?
- ओके ओके, बियर ही सही।
बियर्स के साथ चियर्स करने के बाद वातावरण बदला और बातों का सिलसिला चल पड़ा।
- गोयल सा पहले कभी दस रूपए का नोट गिर जाता था तो इतना अफ़सोस नहीं होता था। आसपास नोट देखने की कोशिश की या जेब में चेक किया, अगर नहीं मिला तो एक मिनट में फैसला हो जाता था कि छोड़ो यार जिसकी किस्मत में है उठा लेगा। अब अगर दस का नोट गुम हो जाए तो झटका सा लग जाता है और डर भी - कहीं सब्जी वाले को गलत पैसे तो नहीं दे दिए ? मैं इतना लापरवाह कब से हो गया ? कहीं भूलने की बिमारी तो नहीं लग गई ? अब बताइये घबराहट में उस दस रूपए के बदले हजार रूपए का खून जला दिया।
- हाँ आई एग्री सर। छोटी-छोटी बातों से भी कई बार घबराहट हो जाती है और देर तक पीछा नहीं छोड़ती। एक बार मैंने पार्टी में ज्यादा खा लिया था। ओ भाईसाब रात भर बेचैन रहा कभी ये चूरन कभी वो गोली। मैंने सोचा - "गोयल तू तो गयो आज। क्यों स्वाद के लालच में फंसा तू ?" अगले दिन कान पकड़े और फैसला किया कि डिनर करने जाना ही नहीं, और अगर जाना पड़े तो कुछ खाना नहीं। रात भर संध्या की डांट खाई वो अलग। वाकई भाई इस उम्र के हिचकोले बड़े जबरदस्त हैं।
- अरे गोयल साब कुछ ना पूछो। अब तो अगर पत्नी पूछ ले - कहाँ चले ? - ये क्या कर रहे हो ? - ये क्यों खा रहे हो ? तो बस इतने में ही टेम्प्रेचर बढ़ जाता है ! लगता है - "ये तो अच्छी भली हुआ करती थी अब इसे क्या हो गया है - सवाल पर सवाल।" ऐसा महसूस होने लगता है कि कुछ गड़बड़ होने वाला है भाग लो यहाँ से।
- हाहाहा सही है। पत्नी का नाम लिया है तो भाई अब जल्दी प्रोग्राम ख़तम कर लो, तानाशाह आने वाली है। उसके ऑफिस आर्डर के मुताबिक बियर के गिलास और चखने की प्लेटें मैंने ही धोनी हैं। ये सब समेट देता हूँ वर्ना एक लंबा लेक्चर सुनना पड़ेगा और मज़ा किरकिरा हो जाएगा। वाह ! शार्ट - टर्म डर तो फुर्र हो गया बाकी फिर देखा जाएगा। शुक्रिया।
| डरने का नहीं, चलते जाने का ! |