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Friday, 9 September 2016

बेटा बेटी

मंदिर से निकल कर मिसेज़ मेहता ने मिसेज़ गुप्ता से बोली,
- अच्छा जी चलती हूँ मैं. बहू के आने का टाइम हो गया है.
- आपका ख्याल रखती है कि नहीं ? हमारी तो बिचारी सुबह सुबह निकल जाती है रात को आती है. अपना ही ख्याल नहीं रख पाती उल्टा हमें ही उसका ध्यान पड़ता है. क्या करें आजकल नौकरियां ही ऐसी हो गई हैं. ना आने का टाइम  है ना जाने का. फिर ये मीटिंग शीटिंग आजकल बहुत चल पड़ी हैं. कभी बम्बे जाना है तो कभी बंगलोर.
- ना ये तो आ जाती है छे सवा छे. भई पीठ पीछे कै रई हूँ ख्याल रखती है. बेटा बहू दोनों ही ख्याल रखते हैं जी. जो सच्ची बात है सो है.
- नईं वैसे तो ठीक है. बाहर भी जाते हैं तो भी ध्यान रखते ही हैं. तक़रीबन हर सन्डे बाहर ही खाते हैं तो मुझे भी ले जाते हैं. पर थकावट हो जाती है जी. आजकल इतने अंग्रेजी खाने चल पड़े हैं न जी कि बस हमें तो नाम ही याद नहीं रहते ना ही हजम होते हैं जी अब.
- हंजी हंजी वो तो है. हमारी बहू भी कह रही थी कि शनिवार को डिनर पर चलेंगे. अच्छा जी मिसेज़ गुप्ता बाय.

चलते चलते मिसेज़ मेहता को ख़्याल आता रहा कि बेटा बाहर ले जाता है पर ना तो ज़्यादा खाने को मनुहार करता है और ना ही फिरंगी चीज़ें खाने देता है. बेटी तो हर चीज़ खिलाती है सच बेटियों की बात ही और है. बेटी भी दिल्ली में ही रहती है और महीने मे दो तीन बार मिलने आ जाती है और मॉ को अपने प्यार दुलार से सरोबार कर जाती है. बहू बेटे के पास बात करने के लिए रोज़ कोई नया विषय तो होता नहीं सो बात तबीयत ठीक है ?, दवाई ले ली ?, आराम कर लो, नींद ठीक से आई ? वगैरा तक सीमित रहती थी. बेटी के पास मसालेदार विषय बहुत थे. कभी ननद का, कभी सास ससुर का, देवरानी का या फिर पतिदेव का. मिसेज़ मेहता को भी इन बातों में आनंद आता था. बेटी के साथ पूरा दिन भी कम पड़ जाता था. पर उसके जाते ही मिसेज़ मेहता थोड़ी देर गुमसुम हो जाती थी. बेटा माँ को जितना नियम से रखता बेटी एक दिन के लाड़ प्यार में सारे नियम भूला देती. 

शनिवार शाम को बहू ने तैयार होने को कहा साथ में कह दिया की जेवर ना पहनना क्यूंकि रात हो जाएगी. तीनों तैयार हो कर रेस्टोरेंट पहुँच गए. बेटे ने कहा,
- मम्मी आपके लिए क्या आर्डर करूं ? पीज़ा और नॉन-वेज तो आपके लिए ठीक नहीं रहेगा. बाकी आप बताओ. पर आप प्लीज़ ध्यान रखना कल को कोई प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए.
मम्मी ने दाल रोटी खाई.

अगले शनिवार बहू बेटे ने किसी पार्टी में जाना था इसलिए मिसेज़ मेहता ने बेटी को फ़ोन कर दिया. बिटिया ने कहा कि वो शाम को पिक कर लेगी और डिनर करा के वापिस ड्राप कर जाएगी. शनिवार शाम बिटिया आ गई और मम्मी को लिपट गयी,
- ओहो ! मम्मी ये सूट नहीं चलेगा. प्लीज बदलो इसको. अपनी नीली वाली साड़ी निकालो, गले में कुछ पहनो. कोई परफ्यूम लगाओ. अच्छी तरह तैयार हो जाओ ज़रा अब तो मज़े करने के दिन हैं तुम्हारे.
मम्मी, बेटी और जमाई राजा तीनों रेस्टोरेंट पहुंचे. बेटी ने मम्मी से कहा,
- अब बताओ क्या खाओगे मम्मी ? नूडल्स ले लो, चिकन ले लो नहीं तो पास्ता ले लो. जो दिल करता हो खाओ, शौक से खाओ.

मम्मी ने थोड़ा थोड़ा सभी कुछ खा लिया. रात दस बजे घर वापिस आ गए. 11 बजे बेटा बहू भी आ गए. लगभग 12 बजे मम्मी के पेट में दर्द होने लगा. पहले तो लगा अभी ठीक हो जाएगा पर फिर बिस्तर से उठना ही पड़ा. दर्द भी हो रहा था और घबराहट भी कि बेटा डांटेगा.

लाइट जलाई और दवाइयों का पिटारा खोला और गोली ढूंढ ली. स्टील के गिलास में बड़ी सावधानी से पानी डाला ताकि आवाज़ ना हो. लेकिन सावधानी कुछ ज्यादा हो गई और भरा हुआ गिलास गिर पड़ा. बेटा भागा हुआ आया और जान गया की रात को जागना पड़ेगा. मम्मी की क्लास तो उसी वक़्त रात को 12.30 बजे ही लग गई. 

सुबह बिटिया का फ़ोन आया.
- मम्मी आप कैसी हो ?
- कैसी क्या ? तेरे लाड में जाने क्या क्या खा लिया. रात से पेट में दर्द हो रहा है. अब गोलीयां खा रही हूँ और साथ में तेरे भाई की डांट पी रही हूँ. बहुत गुस्से में है. और सुन ले, तेरी क्लास शाम को लगने वाली है !

आप क्या लेंगे ?

- - - गायत्री वर्धन, नई दिल्ली.



Tuesday, 6 September 2016

नीम हकीम

कायदे से तो रंगरूटों से, अनाड़ियों से और नीम हकीमों से बच के रहना चाहिए. अगर कोई नौसिखिया L लिख कर गाड़ी चला रहा हो तो तुरंत वो रास्ता छोड़ दीजिये. अगर कोई ट्रेनी होटल में आपकी सेवा कर रहा हो और आपने वेज आर्डर किया हो तो वो शायद नॉन-वेज ही ले आएगा. या अनाड़ी मिस्त्री से अपनी फटफटिया में पंचर बनवाया तो पहिया फिट करने के बाद शायद ब्रेक कसना भूल जाएगा. पर हमारा वास्ता पड़ गया मेडिकल कॉलेज के नौसिखिया याने इंटर्न डॉक्टर से.

- डॉक्टर साब एक महीना हो गया दवाई लेते हुए पर ये बाजू पर से खुजली ख़तम ही नहीं हो रही. वैसे का वैसा लाल निशान बना हुआ है.
- हूँ. हाँ ये तो वैसा ही है. आप एक टेस्ट करा लो.
- जी ठीक है.
- पहले सामने वाले केबिन में प्रोफेसर गुप्ता हैं उन्हें दिखा लो.
प्रो. गुप्ता स्किन स्पेशलिस्ट से मिलकर हाल बताया,
- डॉक्टर साब एक महीने से दवाई ले रहा हूँ पर ये देखिये ठीक ही नहीं हो रहा. वो डॉक्टर कह रहीं हैं कि टेस्ट करा लो.
- हूँ. कब से है ? पर्चा दिखाओ ? पहले से कम नहीं हुआ ? हूँ टेस्ट करा ही लो अच्छा रहेगा.
पर्चा लेकर वापिस असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर श्रीमती सक्सेना के पास पहुँच गए.
- डॉक्टर साब प्रोफेसर गुप्ता कह रहे हैं के टेस्ट करा ही लो.
- हाँ मैंने तो पहले ही कहा था आपको. आप बैठो जरा.

घंटी मार के श्वेता को बुलाया. श्वेता पतली दुबली लड़की सफ़ेद कोट पहने हुए हाज़िर हो गई जाहिर था कि मेडिकल की छात्रा रही होगी.
- इनका टेस्ट कर दो, पता है ना कैसे करना है ? इनको साथ ले जाओ. आप जाइए इनके साथ.

- आप यहाँ लेट जाइए प्लीज, डॉ. श्वेता ने कहा और झट से एक डॉ. कविता भी आ गयी. उसने भी सफ़ेद कोट पहना हुआ था. मतलब दोनों ही छात्राएं थी. दोनों ने तैयारी शुरू कर दी. एक दूसरे को बताती भी जा रहीं थी.
- कॉटन रख ली ? इंजेक्शन ले लिया ? लोकल अनस्ठेशिया ले लिया और टेस्ट ट्यूब ?
उनकी बातों से नौसिखिया-पन साफ़ झलक रहा था. खुदा खैर करे !

- आप बाजू सीधा रखें, डॉ. श्वेता ने कहा. कलाई पर एक जगह रुई से दवाई लगाई फिर वहां इंजेक्शन लगा दिया.
- दर्द है ? अब कम है ? अब नहीं है ? नहीं है न ?
- नहीं दर्द नहीं है. सुन्न हो गया है.
इस बीच केबिन में कोई आया. डॉ. श्वेता बोली,
- हरेंदर सुबह से नज़र नहीं आये ? इतनी जोर से भूख लगी हुई है. ये लो कुछ खाने के लिए ले आओ.
- अभी लो जी. क्या लाऊं ? जूस ?
- अरे आपको खाने को बोला है आप जूस की बात कर रहे हो. जल्दी ले आओ. जो मिलता है वही ले आओ. आपको दर्द तो नहीं हो रही है ? कविता वो बॉक्स देना.
- डॉ साब आप पहले नाश्ता कर लो.
- हूँ ! कहकर डॉ श्वेता ने बॉक्स में से लम्बी सी सलाई निकाली जिसके सिरे पर गोलाई में बारीक दांत बने हुए थे जैसे मिनी गियर हो. उसे स्किन पर लगा के जोर से दबा के गोल घुमाया तो चमड़ी का पीस बाहर निकल आया. उसे टेस्ट ट्यूब में डाल दिया.
- कविता इनकी बैंडेज कर दो.

डॉ श्वेता ने टेस्ट ट्यूब पर चेपी लगा कर नाम लिख दिया और ट्यूब का मुंह सील बंद कर दिया. अब सैंपल लेकर हम तीनों फिर असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर श्रीमती सक्सेना के पास वापिस पहुंचे. वो देखते ही तुनक कर बोली,
- ये क्या किया श्वेता ? हेल्दी स्किन का सैंपल निकाल लिया ? जहाँ इन्फेक्शन है वहां से सैंपल लेना था. दोबारा करो.

ये होता है अनुभव दूर से ही भांप लिया. चलिए साब हम तीनों के चेहरे उतर गए. तीनों वापिस केबिन में आ गए. फिर लिटाया गया, इस बार दूसरी जगह पर अनेस्थिशिया लगाया गया, फिर से इंजेक्शन लगाया गया और फिर से चमड़ी उधेड़ दी गई. चमड़ी नई टेस्ट ट्यूब में डाल कर डॉ श्वेता द्वारा नाम की चेपी लगा दी गई और ट्यूब का मुंह सील कर दिया गया. डॉ. कविता ने नई पट्टी कर दी और टेस्ट ट्यूब लेकर लैब की ओर प्रस्थान कर गयी. डॉ. श्वेता बर्गर खाने लगी और हम कलाई पर दो पट्टियाँ बंधवा कर बाहर नीम के नीचे बेंच पर बैठ गए.
नीम हकीम ख़तरा-ए-चमड़ी !

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