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Saturday, 29 August 2026

दादी, दादू और बिट्टू - 5

 "सोमरसॉल्ट"

हमारा बिट्टू बैंगलोरी है और अभी छे साल का है। सुबह सात बजे बस में बैठ कर स्कूल जाता है। बैंगलोर के स्कूलों में इंग्लिश काफी बोली जाती है। साथ ही स्कूल में हिंदी और कन्नड़ का अक्षर ज्ञान भी दिया जा रहा है। 

कन्नड़ के कुछ शब्द हम भी बिट्टू से सीख चुके हैं जैसे कि - दादा-दादी (या नाना-नानी) को अज्जू और अज्जी कहते हैं। इसके अलावा कन्नड़ में सेब को सेबू, केले को 'बाले हन्नू', अमरुद को 'सीबे हन्नु', संतरे को 'कित्ताले हन्नु' कहते हैं।

पर बिट्टू की इंग्लिश लाजवाब है। कभी कभी बेहतरीन डायलाग सुनने को मिल जाते हैं। कल शाम की बात है बिट्टू अपनी साइकिल चलाते चलाते टायर दादू के पैर के पास ले आया और बोला,

- Dadu out of the way!

- No, you turn to right and go. 

- Dadu out of the way!

- No, you take a turn to right Bittoo and go!

- You go out of this world Dadu!

दादू को ही हटना पड़ा वहां से! 😬

  *****

एक दिन स्कूल से एक नया शब्द सीख कर आया बिट्टू। आ कर उस ने ब्रो (bro याने brother) बोलना शुरू कर दिया। पापा को 'पापा ब्रो' और दादू को 'दादू ब्रो' बोलने लगा! 

काफी मशक्कत लगी समझाने में कि bro का मतलब क्या है, पर फिर अगले दिन से उसने हमें bro नहीं बोला।

  *****

बिट्टू की मातृ-भाषा पंजाबी है पर जानता नहीं है। घर में ज्यादातर इंग्लिश-भाषी है और स्कूल में फुल इंग्लिश-भाषी है इसलिए इंग्लिश अच्छी जनता है। घर में हिंदी - भाषी तो है पर कभी-कभी हिंदी कुछ अलग अंदाज़ से बोलता है। जैसे : 

- ये चाय का कप तुमका है।

- पार्क में तुमके साथ हम भी जाएगा। उधर में साइकिल चलाएगा। 

ऐसी भाषा बोलने का कारण शायद घर की नेपाली मेड है। 

अब स्कूल में कन्नड़ सीख रहा है। बिट्टू के शब्दकोष में सबसे ज्यादा इंग्लिश के शब्द हैं, उस से कम हिंदी के, उस से कम कन्नड़ के और पंजाबी के ? निल बटा सन्नाटा। मुझे लगता है कि बड़ा होते होते कोई विदेशी भाषा - फ्रेंच, जर्मन या रूसी भी सीख लेगा! फिर polyglot याने बहुभाषी बन जाएगा।    

फुटबॉलर बिट्टू 

बिट्टू को somersault याने कलाबाज़ी या पलटी मारनी भी आती है। ये उसे फुटबॉल कोच ने सिखाई है। वैसे सभी बच्चे जो फुटबॉल की ट्रेनिंग लेते हैं उन सब को सोमरसॉल्ट आती है। सिर को जमीन पर लगाओ, पैर ऊपर करो और दूसरी तरफ धम्म से पीठ के बल नीचे आ जाओ। 

दरअसल, बच्चे अगर ना सुनें, या फिर कोई गलती कर दें तो कोच ये सजा देता है। जैसे बॉल सीमा के बाहर मार दी तो एक सोमरसॉल्ट करनी होगी। अगर अपने ही पाले में ही गोल कर दिया - याने सेल्फ-गोल, तो दो सोमरसॉल्ट करनी पड़ेंगी।   

आपने अगर फुटबॉल खेलनी हो तो जरा ध्यान से खेलें। बड़े खिलाड़ी अगर गलती करेंगें तो उन्हें तीन सोमरसॉल्ट की सजा झेलनी पड़ेगी। 


3 comments:

Harsh Wardhan Jog said...

https://jogharshwardhan.blogspot.com/2026/08/5.html

Anonymous said...

सीखने, पढ़ने, जानने की कोई सीमा नहीं और सिखाने वाला किसी भी उम्र का हो सकता है, इसका सही चित्रण, साभार - एस के लोहिया

Travalox said...

This article perfectly explains why everyone loves Rajasthan. The Color of Rajasthan tour seems like the best way to see it all in one trip.
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