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Friday, 1 January 2016

आस्तिक और नास्तिक

एक प्राचीन शहर अफकार में दो महाज्ञानी पुरुष रहा करते थे. दोनों के ज्ञान का डंका दूर दूर तक बजता था. परन्तु दोनों महापुरुष एक दुसरे को ज़रा भी ना भाते थे. हमेशा उनकी कोशिश होती थी कि कैसे एक दूसरे को नीचा दिखाया जाए.

उनमें से एक नास्तिक था जो भगवान के अस्तित्व से इनकार करता था और कहता था की भगवान कहीं नहीं है. दूसरा आस्तिक था और भगवान की ही चर्चा करता रहता था.

एक दिन सुबह सुबह दोनों की सरे आम बहस हो गई. दोनों के चेले भी पहुँच गए अपने अपने ज्ञानी गुरुओं को समर्थन करने. घंटों बहस चली कभी नरम तो कभी गरम. कभी एक पक्ष ने शोर मचाया कभी दूसरे ने तालियाँ. कई घंटे गुजर गये तो धीरे धीरे चेले खिसकने लगे. बहस का नतीजा ना निकलता देख थक हार के दोनों महाज्ञानी अपने अपने रस्ते हो लिए.

महाज्ञानी नास्तिक मंदिर पहुंचा, मूर्ति को दण्डवत प्रणाम किया और अपने किये की माफ़ी मांगी. उसने भगवान की आरती की और वो आस्तिक बन गया.

महाज्ञानी आस्तिक अपने घर पहुंचा और अपने सारे धर्म ग्रन्थ बाहर निकल फेंके और उनमें आग लगा दी. अब वो नास्तिक बन गया.


यह किस्सा खलील जिब्रान की एक कहानी The Two Learned Men पर आधारित है जो उनके कहानी संग्रह The Madman में प्रकाशित हुआ है. जिब्रान का अरबी नाम जिब्रान खलील जिब्रान था और उनका जन्म लेबनान में 1883 हुआ. 12 वर्ष की आयु में माता पिता के साथ न्यू यॉर्क चले गए थे और वहीं बस गए थे. उनकी मृत्यु न्यू यॉर्क में 1931 में हुई और उनकी इच्छानुसार उन्हें लेबनान में 1932 दफनाया गया. वो एक कलाकार, चित्रकार, कवि, दार्शनिक और लेखक थे. उनकी बहुत सी रचनाओं में से विशेष हैं : The Prophet और  Broken Wings.



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