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Tuesday, 3 June 2014

छींक दिया न !

बंद क़िस्मत का ताला खोलने के लिए या अच्छे दिन लाने के लिए दोपाये प्राणी सब कुछ करने को तैयार रहते हैं । साथ ही साथ बुरी नज़र से बचने के उपाय भी ढूँढते रहते हैं । पूरे विश्व में बहुत से टोने-टोटके, अंधविश्वास और काले जादू के फ़ार्मूले व्याप्त हैं और इनकी मान्यता  भी है कहीं कम कहीं ज़्यादा । याने मान्यता में कहीं लाल मिर्च ज़्यादा है तो कहीं नमक ।

पर यहाँ तो हरी मिर्च के साथ में निम्बू भी है दुकान के दरवज्जे पर । मानो लाला जी कह रहें हों - जा दूर हट बुरी नज़र वाले । निम्बू तेरे दाँत खट्टे करे और हरी मिर्च तेरा धुआं निकाल दे ! ख्वामखाह निम्बू और मिर्च वेस्ट कर दिए और दाम भी बढ़ा दिए । नज़र उतारने का एक और आसान तरीक़ा है काजल की एक बिंदी सुंदर बच्चों के माथे पर लगा दो बस । और अगर आपने बढ़िया सी कोठी बनाई है तो उस पर एक उल्टी हंडिया ज़रूर टाँगें जो नज़र उतारने के काम आएगी । इस तरह के नज़रबट्टू अब तो बने बनाए बाज़ार में मिल जाते हैं । 

वैसे तो ये कहते हैं की पढ़े लिखे लोग और विकसित देशों में अंधविश्वास कम होते हैं पर ख़त्म फिर भी नहीं हुए । भारत में तो शिक्षा अभी 75% के आस पास है और यहाँ तो अभी 'साइंटिफ़िक टेम्पर' और भी पीछे होगा । और फिर यहाँ बाबाओं और गुरूओं की कमी नहीं जो उजाले से अंधेरे की ओर ले जा रहे हैं और डालर कमा रहे हैं । याने समोसा और हरी चटनी दोनों का मजा ले रहे हैं । 

पर अपने देश की बात ही अलग है । चंद्र यान हो या मंगल यान उनको छोड़ने से पहले वैज्ञानिक अगर थोड़ी बहुत पूजा कर लें तो कोई हर्ज नहीं है । इस तरह की मान्यताओं को बढ़ाने में नेताओं का भी पूरा सहयोग है । चुनाव हारें या जीतें झट गुरू जी के चरणों में लेट जाते हैं । मुहूर्त निकाल कर नामांकन दाख़िल करेंगे चाहे हार ही जाएँ । 

स्पेन में मान्यता है की 31 दिसम्बर रात 12 बजे 12 अंगूर खाने से 12 महीने तक ख़ुशहाली रहेगी । आसान रास्ता है जी ख़ुशहाली लाने का । क्यूँ न आज़माया जाए ? शायद कुछ विदेशी मुद्रा ही हाथ लग जावे । 

पर दैनिक जीवन में हम सभी जाने अनजाने कुछ मान्यताओं के शिकार हैं । जैसे की मंगलवार को बाल और नाख़ून नहीं कटाने चाहिए । अब अगर इसके बावजूद आप कटिंग के लिए तैयार भी हों तो कैसे कटाएँगे नाई की दुकान तो मंगल को बंद होती है । मंगलवार को तो मुर्ग़ा भी बिन्दास घूमता रहता है उसकी कटिंग भी मना है । 

दाँए हथेली में ख़ारिश का मतलब है धन प्राप्ति और बाँए हथेली की खुजली का मतलब है कि आपका पैसा उड़न छू । अब अगर मान लें की भारत में पाँच करोड़ लोग हैं जिन्हें पहली तारीख़ को तनख़्वाह मिलती है तो वे सभी लोग पहली तारीख़ को दाएँ हथेली खुजाते मिलेंगे । पर गुरूजी का कहना है की खुजली सिर्फ़ बोनस मिलने पर होती है या छप्पड़ फटने पर । 

एक और मज़ेदार रिवाज या मान्यता है शगुन का एक रूपया । याने शगुन में 100 या 500 के बजाय 101 या 501 देना । जब एक रूपए का नोट चलता था तब तो इसकी माँग शादियों में काफ़ी हुआ करती थी । अब तो एक एक रूपए के सिक्के शगुन के लिफ़ाफ़ों पर चिपके मिलते हैं और शायद एक दो साल में यह प्रथा भी समाप्त हो जाएगी - जी हाँ एक रूपए की शगुन की नहीं !

रूस में एक मान्यता है की आपकी प्रॉपर्टी पर अगर चिड़िया बीट कर दे तो उसमें कुछ बढ़ोतरी होने वाली है ! वाह साब ख़ूब सारा  चुग्गा-दाना छत पर डाल दीजिए बस बीट ही बीट और प्रॉपर्टी ही प्रॉपर्टी !

हमारे कामवाली ने एक बार बताया था की फ़लाँ घर में नया झाड़ू इस्तेमाल करने से पहले उस पर जल छिड़क कर, सुखा कर पूज लिया जाता है । शायद इसलिए की झाड़ू इस्तेमाल करते करते कोई क़ीमती चीज़ बाहर न चली जाए । हे झाड़ू देवता ध्यान रखियो !

अररर छींक दीया न ! बस अब कथा यहीं समाप्त ।





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