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Tuesday, 4 September 2018

केरल की यादगार यात्रा

सितम्बर 2014 में कन्याकुमारी से दिल्ली तक मारुती 800 में यात्रा की थी. अरब सागर के किनारे किनारे एडापल्ली-पनवेल हाईवे जिसे अब NH 66 कहते हैं, कार चलाई थी. चलते चलाते रास्ते में केरल के कई मंदिर, किले और शहर देखते आए और इन निम्नलिखित शहरों में एक एक दो दो दिन ठहरे भी थे:
थिरुवनंतपुरम ( Trivandrum ),
अल्लेप्पी ( Alleppy / Alappuzha / अलेपूझा / अलेपूया ),
कोची ( Kochi /  कोचीन /  Cochin ),
मुन्नार ( Munnar )
त्रिचूर ( Trichur / Thrissur ) और
कालीकट ( Calicut / कोझिकोड / कोशिक्कोड / Kozhikode ).
बहुत सुंदर, हरा भरा, पहाड़ियों और झरनों से भरपूर और समन्दर के साथ साथ फैला हुआ प्रदेश है. यहाँ चालीस से ज्यादा नदियाँ बहती हैं जिन पर 80 छोटे बड़े बाँध हैं. इसलिए केरल में बिजली, पानी और हरियाली की कमी नहीं है. प्रदेश का गठन 01.11.1956 में हुआ था. 14 जिले हैं जिनमें से थिरुवनंतपुरम शहर सबसे बड़ा है और राजधानी भी है. प्रदेश की आबादी 3.34 करोड़ है जबकि 1850 में यहाँ की आबादी 45 लाख थी. पर्यटन के प्रति समाज में दोस्ताना माहौल है जिसकी वजह से लाखों की तादाद में देशी विदेशी पर्यटक आते रहते हैं.

पिछले दिनों आई अभूतपूर्व बाढ़ में यहाँ जान माल का काफी नुकसान हुआ. भगवान से प्रार्थना है कि जल्दी से जल्दी वहां सामान्य स्थिति बहाल हो जाए. रास्ते में ली गई कुछ फोटो प्रस्तुत हैं :

1. कोची का backwaters. जब समन्दर में ज्वार आता है तो पानी शहर की नहरों में अंदर आ जाता है और भाटा के साथ पानी वापिस चला जाता है और शहर की सफाई भी हो जाती है 

2. थिरुवनंतपुरम की ओर जाती सड़क. सारा केरल इसी तरह से हरा भरा है  

3. अल्लेप्पी सागर तट पर मत्स्य कन्या या mermaid 

4. कालीकट से आगे चलते हुए एक बोर्ड नज़र आया 'Handicrafts Village' तो गाड़ी उधर मोड़ ली. पर टिकट के लिए थोड़ी देर इंतज़ार करना पड़ा. अंदर कारीगर सुंदर सुंदर चीज़ें बना रहे थे   

5. कालीकट का सागर तट

6. थिरुवनंतपुरम का सरकारी होटल जिसके पांचवें माले पर रुके थे 

7. शाम के समय थिरुवनंतपुरम का साफ़ सुथरा बस अड्डा 

8. ओणम त्यौहार वाले दिन बस की इंतज़ार. महिलाओं ने बिंदास सोना पहन रखा है क्यूंकि बस के सफ़र में कोई ख़तरा नहीं है. मौसम गरम और उमस भरा रहता है इसलिए खादी या सूती कपड़े ही आराम देते हैं. उमस और अचानक बारिश के कारण पैर में जूते जुराबें पहनना मुश्किल है चप्पल ही बेहतर है    

9. कोची फोर्ट के पास फुटपाथिये रेस्तरां. यहाँ समन्दर की हवा लगातार चलती रहती है पर धूल बिलकुल नहीं है. और पंखा भी नहीं चलाना पड़ता. इसलिए फुटपाथिये रेस्तरां का अलग ही मज़ा है. तरह तरह के व्यंजन मिल जाते हैं 

10. हरे भरे मुन्नार के हरे भरे रास्ते में 

11. मुन्नार के सुंदर चाय बगान  

12. श्रीपद्मनाभास्वामी मंदिर थिरुवनंतपुरम. दुनिया के सबसे बड़े खज़ाने वाला मंदिर  

13. यहूदी मंदिर या परदेसी सिनागोग. ये 1568 में बना था. इसके दूसरे नाम हैं - Cochin Jewish Synagogue / Mataancherry Synagogue. मूल रूप से चौथी सदी में परदेसी सिनागोग कोदुन्ग्लुर में बना था. यहूदी यहाँ मसालों के व्यापार के लिए आते थे जिनमें से कुछ यहाँ बस भी गए और मालाबार यहूदी कहलाये  

14. श्रीगुरुवायूर मंदिर का आंगन. मंदिर में कृष्ण के बाल स्वरुप की पूजा होती है        

15. आधुनिक मस्जिद. सातवीं आठवीं शताब्दी से अरब व्यापारी केरल में मसालों के लिए आ रहे थे 

16. त्रिचूर में एक चर्च. जीसस क्राइस्ट के शिष्य संत थॉमस यहाँ सन 52 में अर्थात पहली शताब्दी में केरल आये थे.  

17. बेकल फोर्ट से लिया गया फोटो  

18. त्रिचूर का वडक्कुनाथन याने उत्तर के नाथ, शिव मंदिर. मंदिर का इतिहास एक हज़ार साल से भी पुराना है   

19. श्री कृष्णा मंदिर त्रिचूर में शादी. यहाँ शादियाँ सुबह सुबह ही हो जाती हैं  

20. मुन्नार के रास्ते में एक झरना 

केरल जाएं तो छुट्टी ज्यादा लेकर जाएं. प्रदेश के 14 जिलों में से हर एक में कुछ ना कुछ देखने समझने के लिए है. पर्यटकों के लिए माहौल अच्छा है क्यूंकि यहाँ पर्यटक और मसाला व्यापारी सदियों से आते रहे हैं. प्रदेश भारत के उत्तरी राज्यों से ज्यादा समृद्ध, शिक्षित और अनुशासित लगा. घूमने की सभी सुविधाएं आसानी से मिल जाती हैं.
एक बार जरूर जाएं.

20. हरा भरा केरल 




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