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Saturday, 18 June 2016

टेलकम पाउडर

स्कूटर पर बैठे नरूला साब गुनगुनाते हुए ख़रामा ख़रामा 30-35 की स्पीड पर बैंक की तरफ जा रहे थे. चेहरे पर हलकी हलकी हवा लग रही थी बस आनंद आ रहा था. शनिवार का दिन था इसलिए शंकर रोड पर ट्रैफिक बहुत कम था. वैसे भी पहले दिल्ली में ट्रैफिक कम ही हुआ करता था. निर्मला सुबह सात बजे स्कूल पढ़ाने निकल गयी थी और छवि बिटिया सुबह नौ बजे पढ़ने चली गयी थी. छवि पहले आएगी तो दादी संभाल लेगी फिर निर्मला आ जाएगी और फिर नरूला साब पहुच जाएंगे. बैंक की नौकरी भी आज आधे दिन की है. 15 साल के बाद अफसर बने थे नरूला साब पर खुश थे. बस ऐसी ही ख़ुशी और शांति बरकरार रहनी चाहिए जिंदगी में क्यूँ जी ?

पर जब स्कूटर ने मंदिर मार्ग की तरफ मोड़ काटा तो शांति भंग हो गयी. सिर्फ 50 मीटर आगे खाली सड़क पर एक सुन्दरी रुकने का इशारा कर रही थी. उतावलेपन से हाथ हिला रही थी और एक सेकंड को नरूला साब को लगा कहीं सुंदरी स्कूटर से टकरा ही ना आ जाए. फ़ौरन ब्रेक लगाई. ऊपर से नीचे तक नज़र मारी तो देखा की सुंदरी के गले में लाल स्कार्फ, सफ़ेद ब्लाउज और लाल स्कर्ट. नरूला जी मन ही मन बड़बड़ाए,
- ओये नरूला कहाँ तेरी बैंक की अफसरी और कहाँ ये एयरलाइन की उड़न तश्तरी ?
- प्लीज़ प्लीज़ प्लीज़ ज़रा रीगल तक ड्राप कर दो ? थैंक्यू थैंक्यू.
इसके पहले कि नरूला साब कुछ सोच पाते, हाँ या ना कर पाते, उड़न तश्तरी पिछली सीट पर बैठ चुकी थी. रीगल तक की यात्रा आठ मिनट में तय की जानी थी. उस आठ मिनट में नरूला साब के दिमाग में आठ सौ विचार बिजली की तरह कौंध गए. यहाँ सारे विचार लिख कर देना उचित नहीं होगा क्यूंकि आपके पास तो समय नहीं है पढ़ने का. नरूला साब के लिए भी उचित नहीं है क्यूंकि उनकी शान्ति भंग होने का खतरा है. नरूला साब स्कूटर भी चला रहे थे और साथ ही साथ उनका दिमाग हिचकोले खा रहा था. पर उमड़ते घुमड़ते विचारों के कुछ नमूने तो पेश किये ही जा सकते हैं क्यूँ जी ?

मंदिर मार्ग से गोल डाकखाने की तरफ मुड़े तो उन्हें लगा कि पांच साल हो गए स्कूटर चलाते चलाते पर आज पहली बार कोई सुन्दरी बैठी है अपने स्कूटर पर. निर्मला तो खैर घर की बात है क्यूँ जी?
नरूला साब गोल डाकखाने से बाबा खड़क सिंह मार्ग की तरफ बढ़े तो ख्याल आया की स्कूटर के बजाय फर्राटेदार फटफट होनी चाहिए थी. स्कूटर तो ढीला है नहीं जी?
रीगल के नज़दीक विचार आया की हाँ आज तो टेलकम पाउडर लगाया हुआ है. लेकिन आज ही अपने लिए एक अलग पाउडर का डब्बा लेकर आता हूँ बढ़िया वाला क्यूँ जी?
इसी उधेड़बुन में रीगल आ गया और सुन्दरी ने उतरते ही ढेर सारे थैंक्स दे दिए साथ में ये भी पूछ लिया,
- आप कहाँ काम करते हैं?
- वो सामने बैंक में.
- ओके, ओके, ओके. बाय-बाय !
नरूला जी ने सोचा हाय री किस्मत अपना पता तो बताया नहीं मेरा पता पूछ कर फुर्र हो गई. पर नरूला साब की ग़लतफ़हमी थी की वो फुर्र हो गयी. मंगलवार को बैंक में फिर फुर्र से आ गई और काउंटर की पीछे आकर नरूला साब के टेबल के सामने प्रकट हो गई. सारे स्टाफ की नज़रें नरूला साब पर टिक गईं.
- हेल्लो सर नमस्ते. प्लीज ज़रा हेल्प कर दो. कुछ पैसे थे मेरे पास मेरी एक फिक्स बनवा दो.
नरूला साब ने बिजली की रफ़्तार से काम किया. इससे पहले कि कैशियर मैडम के नोट गिनता और क्लर्क अपने लेजर में फिक्स डिपाजिट का नया खाता खोलता उन्होंने अपने हाथ से फिक्स डिपाजिट रसीद बना कर मैडम को थमा दी. बाकी काम तो ये निकम्मे लड़के करते रहेंगे. मैडम ने हाथ मिलाया चार पांच बार थैंक्स बोला और फिर से फुर्र हो गयी. मैनेजर साब ने भी नरूला साब को दाद दी और स्टाफ से कहा,
- ये होती है कस्टमर सर्विस और ऐसे होते हैं अफसर. आप लोग भी कुछ सीखो नरूला साब से.

अगले शनिवार को नरूला साब ने बड़ी मेहनत से शेव बनाई. बाथरूम में और ज्यादा टाइम लगाया और फिर खूब सारा नया टेलकम पाउडर भी छिड़क लिया. इत्मीनान से 30-35 की स्पीड पर स्कूटर फिर मन्दिर मार्ग से निकाला पर मैदान साफ़ था. बल्कि वहां से रीगल तक नरूला साब नज़रें घुमाते रहे पर मैडम नदारद. पर क्या किया जा सकता है नहीं आई तो नहीं आई.

पर 12 बजे बैंक में मैडम फिर प्रकट हो गई. इस बार चेहरा उतरा हुआ था और पीछे पीछे हवालदार भी था. सारे स्टाफ की नज़रें नरूला साब पर टिक गयीं. हवालदार भारी ऊँची आवाज़ में बोला,
- इनकी ये रसीद कैंसिल करके पीसे दे दो मैडम को. इन की जमानत होणी है आज. सीधे आदमी लग रहे हो नरूला साब. बस किस्मत अच्छी थी की बच गए आप. यो तो बम्बैया गिरोह की मेम्बर है और हफ्ते दस दिन में आपका नंबर भी लग जाणा था.

नरूला जी ने जल्दी से कैशियर से पैसे लाकर मैडम के हवाले किये और उन दोनों को विदा कर दिया. कूलर के ठन्डे पानी के छींटे मुंह पर मारे और सोफे पर लेट गए. थोड़ी देर बाद कुछ खुशबू सी महसूस हुई. ओहो आज तो नया टेलकम पाउडर लगाया था. नरूला साब के चेहरे पर मुस्कराहट आ गई.

चलो रीगल 

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