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Saturday, 21 March 2020

कर्फ्यू में दिनचर्या

इस रविवार जनता कर्फ्यू लगा दिया गया है. जाहिर है अब  बाहर जाना तो मुश्किल है. मुश्किल क्या नामुमकिन ही है. तो अब फिर यार दोस्तों की सन्डे की गप्प गोष्ठी तो ठप्प हो गई. अब सीनियर सिटिज़न घर में रहकर घरवाली से कितना बतिया लेंगे वो तो आप जानते ही हैं. चलिए कुछ तो करना ही है तो प्लान बनाते हैं.

पहले तो ये ससुरा कर्फ्यू होता क्या है इसका पता लगाया जाय. लीजिए साहब गूगल बाबा बताते हैं की कर्फ्यू शब्द फ्रेंच भाषा से लिया गया है याने - cuevrefeu. इसका शाब्दिक अर्थ है cover fire. कुछ ऐसा मतलब रहा होगा की 'हटो हटो रास्ता खाली करो आग बुझानी है'. कालान्तर में झगड़े फसाद में सड़कों को खाली कराने में इस्तेमाल होने लगा. 'चलो फूटो अपने अपने घर जाओ और सड़कें खाली करो'! देशों की आपसी लड़ाई में या हमलों में भी कर्फ्यू शब्द इस्तेमाल होने लगा. शायद पहली बार है की इस शब्द को महामारी से बचने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. पर मतलब तो वही है कि अपने घर में घुसे रहो बाहर नहीं निकलना है ख़बरदार. 

आजकल सरकारें कर्फ्यू का समय घोषित कर देती हैं. अमुक समय से तमुक समय तक घर में रहना वरना ...! फिर कर्फ्यू में ढील भी देती हैं और फिर कर्फ्यू खोल भी देती हैं ! ये कर्फ्यू रविवार का ही है और हमारे आपके और सबके लिए अच्छा ही है. कोरोना से बचने का आसान और अच्छा उपाय है. बुजुर्गों को कुछ ज्यादा ही बुरी नज़र से देखता है ये वायरस. लीजिये साब मोटा मोटी प्लान का ख़ाका बना लिया है जिसे मालकिन से पास करा लेता हूँ ताकि बाद में पंगा ना हो वर्ना हुक्का पानी बंद होने का ख़तरा रहता है :-

> प्रातः योगा क्लास 5.30 से 6.30 - योगा की चटाई और दरी पार्क में नहीं बल्कि ड्राइंग रूम  बिछाई जाएगी, 

भ्रामरी गुंजन 

> सुबह 7.30 से लेकर 9.30 तक किचन से लेकर डाइनिंग टेबल तक की सैर होगी. इसी दौरान चाय नाश्ता भी होगा,
> नाश्ते के बाद 9.30 से 10.30 तक ड्राइंग रूम और बेडरूम के बीच सैर की जाएगी,
> उसके बाद 2 बजे तक फेसबुक, ट्विटर, पुराने गाने और मोबाइल फोन पर बातचीत, फिर खाना और फिर पांच बजे तक विश्राम किया जाएगा,
> उसके बाद चाय वाय और तीनों बेडरूम की सैर की जाएगी 
> ताली, थाली, घंटी या घंटा बजाना नहीं समझ आया. डॉक्टर और नर्सों के अलावा बहुत से और लोग भी ड्यूटी पर होंगे उन सब को सलाम. शोर मचा कर क्यूँ पड़ोसियों को डिस्टर्ब करना है ? उसके बजाय मैडिटेशन में बैठना ठीक रहेगा. या फिर प्राचीन भारतीय दर्शन शास्त्र में से कुछ बांचा जाए 

मैडिटेशन 

> उसके बाद बेडरूम से लेकर डाइनिंग टेबल तक की परिक्रमा, फिर हल्का भोजन और शुभरात्रि.

आपका क्या प्लान है ?