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Friday, 22 September 2017

हिंदी दिवस की पार्टी

साब ने अपने मटके जैसे पेट पर लाल टाई सेट की और शीशे में नज़र मारी. टाई ओके है. सिर पर आठ दस बाल बचे थे पर फिर भी आदतन उन बालों में कंघी घुमा दी. बेल्ट दुबारा से बाँधी. ये कमबख्त परेशान करती थी. दिन में दो तीन बार खोलकर फिर बांधनी पड़ती थी. क्या किया जाए बियर की चियर्स तो शाम को करनी ही होती है. और अब फर्क भी क्या पड़ता है जी रिटायर होने में चार महीने ही बाकी हैं. अब मेकअप की आखरी आइटम थी फुसफुस. दोनों साइड खुशबू स्प्रे करके सरकारी गाड़ी में बिराजमान हो गए. ड्राईवर से बोले,

- ऑफिस चलो. और सुनो 11 बजे मंत्री जी की फ्लाइट आनी है. हिंदी अफसर को ले जाना और रास्ते में दो ढाई सौ का एक बुक्के बनवा लेना. उनके नाम की तख्ती भी बनवा कर साथ ही ले जाना. निर्मला को बोल देना कंप्यूटर से हिंदी में कागज़ पर सुंदर सा नाम छाप देगी. तुम तख्ती पकड़ना और निर्मला बुक्के पकड़ लेगी. बुक्के का बिल संभाल लेना.

हमारे साब बड़े सिस्टम से चलते हैं तभी ना झुमरी तलैय्या के रीजनल मैनेजर हैं. झुमरी तलैय्या बैंक का सबसे बड़ा रीजन है और यहाँ बड़े बड़े लोन हैं. साब की बैंक के चेयरमैन साब के साथ अच्छी पटती है. साब बड़े बड़े लोगों के साथ शाम को क्लब में बैठते हैं. कभी कभी मेमसाब भी साथ जाती हैं.
ऑफिस पहुँच कर साब ने एक नज़र हॉल में मारी फिर अपने केबिन में घुस कर सिंहासन पर बैठ गए. चाय की चुस्की लेकर घंटी मार दी.
- निर्मला को भेजो.
- निर्मला जी गुड मोर्निंग. वाह ये अच्छा किया आज आप साड़ी पहन कर आई हैं. आज हिंदी अधिकारी लग रही हैं. वर्ना जीन वीन पहन कर आती हैं तो अंग्रेज़ी भाषा की अफसर लगती हैं. ऐसा है कि मंत्री जी की 11 बजे की फ्लाइट है. ड्राईवर आपको ले जाएगा. मंत्री जी को आप बुक्के दे देना और ढंग से ले आना. अच्छी रिपोर्ट लेनी है उनसे. डीएम ऑफिस जाना है वरना मैं खुद ही जाता. खैर उनको शाम को मैं छोड़ दूंगा. और क्या तैय्यारी है आज की ?
- जी बारा साढ़े बारा बजे मुख्य अतिथि को कार्यालय का निरीक्षण करा देंगे और मैनेजरों से मिलवा देंगे. कोई फाइल वगैरा देखना चाहें की हिंदी में काम हो रहा है या नहीं वो दिखा देंगे. एक बजे से दो बजे तक कांफ्रेंस रूम में मीटिंग होगी जिसमें आप मुख्य अतिथि का परिचय और सम्मान कर देंगे. दस मिनट के लिए उनके आशीर्वचन सुन लेंगे. प्रतियोगिता के पुरस्कार उनसे दिलवा देंगे. फिर आप की बारी है. अंत में मैं धन्यवाद प्रस्ताव रख दूंगी. उसके बाद लंच.
- ठीक-ए ठीक-ए. हमारे ऑफिस की कमजोर कड़ी कौन कौन हैं ?
- वेंकटेश जी उन्हें तो हिंदी लिखनी नहीं आती थोड़ा बहुत पढ़ लेते हैं और बोल लेते हैं. दूसरे हैं कपिल मोहन जी जो अच्छी हिंदी जानते हुए भी फाइलों में इंग्लिश में ही टिपण्णी करते हैं. मानते नहीं हैं. बाकी स्टाफ ठीक है.
- अच्छा. एक काम करो इन दोनों को कोई स्पेशल प्राइज दिलवा दो मंत्री जी से. कुछ भी बहाना मार देना कि हिंदी के लिए बड़ी मेहनत कर रहे हैं ये दोनों प्रबंधक. गिफ्ट में कोई पेन सेट वेट दिलवा देना. और हाँ मेरी तो आख़री स्पीच है अगले हिंदी दिवस में तो मेरी पेंशन लग चुकी होगी. एक पर्चे पर ज़रा स्पीकिंग पॉइंट्स लिख देना बाकी मैं संभाल लूंगा.
- जी सर.

मंत्री जी द्वारा ऑफिस के निरीक्षण के बाद कांफ्रेंस चालू हुई. इनाम बांटे गए और मंत्री जी द्वारा हिन्दी में काम करने पर शाबाशी दी गई और राष्ट्र भाषा के प्रचार प्रसार पर जोर दिया गया. हिंदी अधिकारी ने अनुरोध किया कि क्षेत्रीय प्रबंधक दो शब्द कहें तो उस पर आर. एम. साब जो बोले उसके कुछ अंश:

- माननीय मंत्री जी हमारा तो दिन अंग्रेजी के अखबार से शुरू होता है और शाम टीवी की अंग्रेजी न्यूज़ पर जाकर ख़तम होती है. ऐसा नहीं है कि हिंदी पढ़ लिख नहीं सकते पर अगर आसान सी हिंदी होती तो शायद जल्दी बदलाव आ जाता. पहले बैंक में इंग्लिश के सर्कुलर निकलते थे फिर महीने बाद उनका हिंदी वर्शन आता था. अब दोनों एक साथ आने लगे हैं. लेकिन हिंदी सर्कुलर के अंत में एक लाइन लिखी होती है की विवाद की स्थिति में इंग्लिश सर्कुलर ही मान्य होगा ! चलिए हिंदी लागू हो गई. एक और बात है मंत्री जी जापान में जापानी भाषा अधिकारी नहीं है, रूस में रूसी भाषा अधिकारी नहीं पर हिन्दुस्तान में हिंदी भाषा अधिकारी है. एकाधा हिंदी अफसर नहीं है हजारों की संख्या में हैं चाहे उनके बच्चे इंग्लिश माध्यम स्कूलों में पढ़ते हों. खैर धीरे धीरे लागू हो जाएगी. हमारी ये पारी तो समाप्त हो रही है अगले हिंदी दिवस में मुलाकात नहीं हो पाएगी. सभी को शुभकामनाएं और धन्यवाद.

सभा समाप्त हुई और चूँकि एयरपोर्ट जाने में काफी समय था तो क्षेत्रीय प्रबंधक ने माननीय मंत्री जी से झुमरी तलैय्या क्लब में चलकर बैठने का अनुरोध किया जो स्वीकार कर लिया गया. गपशप हुई और अंग्रेजी के दो दो पेग लगाए गए. माननीय मंत्री जी हवाई जहाज में बैठ कर घर चले गए और क्षे.प्र. सरकारी गाड़ी में बैठ कर घर चले गए.

घर की ओर