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Wednesday, 29 March 2017

मेरठ एक्सप्रेस वे का इंतज़ार


NH 58 - मोदी नगर के नजदीक 

मेरठ की दूरी दिल्ली से मात्र 70 किमी है और अगर आप कार से मेरठ से चलें तो दिल्ली पहुँचने में आपको दो घंटे लगेंगे या तीन या चार या पांच मालूम नहीं. इसलिए आप अपना भविष्य फल अखबार में पढ़ कर निकलें!

मेरठ को गाज़ियाबाद होते हुए दिल्ली से जोड़ने वाला राजमार्ग है NH 58. यह राजमार्ग 538 किमी लंबा है और हरिद्वार, बद्रीनाथ होते हुए माणा याने तिब्बत बॉर्डर तक जाता है. इसलिए सामरिक दृष्टी से महत्वपूर्ण है. वैसे भी राजधानी के नज़दीक होने के कारण मेरठ में फ़ौज की एक बड़ी छावनी है.

मेरठ का नाम लेते ही 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की याद ताज़ा हो जाती है. क्रिकेट के बैट और खेल कूद के सामान की भी याद आ जाती है जो यहाँ खूब बनता है. गन्ने का क्षेत्र है इसलिए गुड़ और चीनी की मिठास याद आती है. हरिद्वार और ऋषिकेश के रास्ते में है मेरठ इसलिए बारहों महीने ट्रैफिक चलता है जिस की वजह से लम्बे लम्बे ट्रैफिक जाम की याद भी आ जाती है.

इन ट्रैफिक जाम में कभी कोई केन्द्रीय या राज्य सरकार का मंत्री फंस जाता है तो शायद सड़क बनवानी याद आ जाती है. बहरहाल इन्टरनेट की खोजबीन से कुछ यूँ पता लगा:

- जनवरी 1999 में लोक सभा में शहरी विकास राज्य मंत्री ने ग़ाज़ियाबाद- मेरठ राजमार्ग बनाने के प्रस्ताव का ज़िक्र किया.

- फ़रवरी 2000 में इस प्रस्ताव को केंद्रीय शहरी विकास मंत्री ने ये प्रस्ताव एक सेमीनार में दोहराया.

- सितम्बर 2005 में 'NCR Transport Plan 2021' प्रकाशित हुआ जिसमें कहा गया कि दिल्ली - ग़ाज़ियाबाद सेक्शन 2001 - 2011 में बनाया जाएगा और ग़ाज़ियाबाद - मेरठ सेक्शन 2011 - 2021 में बनाया जाएगा.

- फ़रवरी 2006 में वित्त मंत्री ने बजट भाषण में मेरठ एक्सप्रेस वे बनाने की घोषणा की और पैसे भी allocate कर दिए.

- अप्रैल 2008 में किसी  consultant को  alignment रिपोर्ट बनाने के लिए कहा गया.

- नवम्बर 2009 में किसी consultant को feasibility रिपोर्ट बनाने के लिए कहा गया.

- अगस्त 2011 में कहा गया कि दिसम्बर 2015 तक राजमार्ग तैयार हो जाएगा.

- दिसम्बर 2011 में फिर कहा गया कि दिसम्बर 2015 तक राजमार्ग तैयार हो जाएगा.

- जुलाई 2013 में प्रधानमंत्री द्वारा बनाए गए steering group ने कहा कि काम की गति बढ़ाई जाए.

- नवम्बर 2013 में राजमार्ग दिल्ली - डासना - मेरठ का नया प्लान बन गया और लागत बढ़ कर ₹ 6450 करोड़ हो गई.

- 2014 में प्लान बदल गया. नया प्लान इस प्रकार है -
* निजामुद्दीन, दिल्ली से डासना तक 27.5 किमी. इस स्टेज में यमुना पर एक नया पुल बनना है और बाकी सड़क को चौड़ा करना है.
* डासना से हापुड़ तक 22.4 किमी लम्बी सड़क को चौड़ा करना है और
* हापुड़ से मेरठ 37 किमी लम्बी एक नई सड़क बननी है,
* इस प्रकार कुल दूरी अब 105 किमी होगी और लागत ₹ 7855.87 करोड़.

- दिसम्बर 2015 में प्रधानमंत्री ने राजमार्ग की नींव रखी.

- दिसम्बर 2016 तक 0 % भी काम नहीं हुआ तो प्रधान मंत्री ने सम्बंधित अधिकारियों की बैठक बुलाई.

उद्घाटन के लगभग 500 दिन बाद अब तक पहली स्टेज का 10-15 % काम हुआ है, दूसरी स्टेज का ठेका नहीं दिया गया है और तीसरी स्टेज की पूरी ज़मीन नहीं ख़रीदी गई है.

ये प्रोजेक्ट कब तक पूरा हो जाएगा पता नहीं. किस तरह से प्रोजेक्ट बनते, बिगड़ते या अटकते हैं समझ नहीं आया. क्या लालफीता शाही आड़े आती है या राजनीति समझ नहीं आया. बस हम तो राजमार्ग तेरा इंतज़ार करते हैं फ़िराक गोरखपुरी के इन बोलों की तरह:

तेरे आने की क्या उम्मीद मगर, कैसे कह दूं के इंतेज़ार नहींं   



NH 58 राज नगर के पास 


NH 58 मोयुद्दीन पुर चीनी मिल के पास 

1857 के स्वाधीनता संग्राम का उद्गम स्थल - बाबा औघड़ नाथ मन्दिर  



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