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Thursday, 30 June 2016

प्रमोसन

रीजनल मैनेजर बनना आसान काम नहीं ना है भैय्या. बहुत तैयारी करना पड़ता है इंटरभ्यु के लिए. पढ़ाई करना जरूरी है और बढ़िया से सूट सिलवाना भी जरूरी है जी. और जो है सो बहुत पैरवी भी कराना पड़ता है जी. और जब एक बार बन गए तो पोस्टिंग कराना कौनों कम झमेला है. बहुत जोर का सिफारिस लगाना पड़ता है इधर ससुरा कम्पीटीसन भी बहुत बढ़ गया है ना.

आप जानिए की हमारे झुमरी तलैय्या रीज़न का बहुत नाम है आल इंडिया में टॉप. आप समझिये की रीजन बहुत बड़ा है, स्टाफ बहुत है और काम बहुत है जी. अब जहां स्टाफ बहुत है तो वहां लाल झंडा का लफड़ा बहुत है. और जहां काम बहुत है वहां माल भी बहुत है समझ गए ना जी. इसलिए झुमरी रीजन बड़ा मसहूर है और हर कोई प्रमोसन लेकर झुमरी का रीजनल मैनेजर बनना चाहता है.

पिछले सोमवार ही तो नए आर. एम. साब आए हैं. हम बता रहे हैं ना जी गोयल साब आए हैं दिल्ली से. 55 साल की उमर है, रंग सांवला, चश्मा लगा हुआ है और सर का बाल फिनिस हो गया है. सफ़ेद कमीज और लाल टाई पहनते हैं. पेट जरा सा बड़ा है. कमीज जो है पेट पर से जोर से दाएं बाएं खिंचा रहता है. वहां का जो दो ठो बटन हैं ना जी वो कमीज को बहुत मुस्किल से रोकता है. अगर बटन टूटा तो समझिये कि एक ठो बटन तो बंगाल की खाड़ी में गिरेगा और दूसरा बटन जो है गिरेगा अरब सागर में.

हमसे बात हुआ था आर. एम. साब का. हम बता दिए हैं कि झुमरी रीजन का भूगोल इतिहास क्या है. बड़ी खुसी से सुने गोयल साब. आपको भी बताए देते हैं की 40 मैनेजर गोयल साब के अंडर में रहेंगे. इनमें से सात तो 'ना जी, ना जी' हैं. मतलब कुछ काम बता दिया जाए जवाब एक ही है - ना जी ये तो नहीं हो पाएगा. कोई बिसनेस टारगेट दे दिया जाए तो जवाब एक ही मिलेगा - ना जी नहीं हो पाएगा.

पांच मैनेजर जो हैं तत्काल 'हाँ जी, हाँ जी' करते हैं. कुछ भी काम हो, कोई भी बिजनेस टारगेट दे दिया जाए तुरन्त जवाब मिलेगा - यस सर ! कैसे करते हैं ईस्वर ही जानता है पर कर लेते हैं ये मानना पड़ेगा.

पांच सात बड़े सयाने हैं जानते हैं ना कैसे घी निकलेगा सीधी अंगुली से या नहीं. बाकी मैनेजर तो डांवाडोल मैनेजर हैं जी कभी इस तरफ कभी उस तरफ. समझिये थाली के बैंगन.

एक दिन आर.एम. साब झा साब से कहे - 'भई झा साब गाँव जाते रहते हो कौनो गाय भैंसिया भी पाले हो ?' झा साब इसारा समझ गए. साम को बाज़ार से किलो भर डालडा लिए, आध किलो अमूल का देसी घी लिए और आध किलो मूलचंद डेरी का देसी घी लिए. घर में ला करके सबको फेंटा मार दिए और दूध वाले डोल में भर के साब के घर पहुंचा दिए - 'साब अपने ही घर का है जी एकदम सुद्ध'. जरा सा समझिये सेवा भाव भी है और बुद्धि भी.

परसों आर.एम. साब मेहता जी से कहे - 'बहुत बढ़िया सफारी पहने हो भई मेहता जी'. बस अगले दिन साब के घर दो ठो सफारी सूट का बढ़िया वाला कपड़ा पहुँच गया. जरा सा समझिये की मेहता जी का सेवा भाव कितना गजब है तब मेवा नहीं मिलेगा मेहता जी को ?

अपने नरूला साब को जानते हैं ? उनका तो एक ही काम है जी साब कोई भी हो ध्यान साब की मैडम का रखना है. और अगर मैडम जी खुस हैं तो काम सोलो आना पक्का. दिवाली में मैडम को सोने का चेन दीजिये और चैन की बंसी बजाइए.

जरा सा समझिये बात को प्रमोसन लेना है की नहीं ?

नियम पे चलना छोड़ दो 


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