Pages

Tuesday, 14 June 2016

दांतों का डॉक्टर

हमारे रीजनल मैनेजर गोयल साब आजकल बड़े खुश नज़र आ रहे हैं. मुस्कराहट एक कान से दूसरे कान तक पहुँच रही है. गोल गोल सांवले चेहरे पर सफ़ेद दांतों की झलक तो बस कमाल कर रही है. बॉस की सफ़ेद कमीज़ पर लाल टाई मटके जैसे पेट पर आकर रुक जाती है पर आज उसे भी बड़े प्यार से बार बार सेट कर रहे हैं. बॉस बियर के शौक़ीन हैं ना इस वजह से टंकी बड़ी है. आज शाम गोयल साब अपने घर ख़ास ख़ास लोगों को बियर पार्टी में बुला रहे हैं. क्या खुशखबरी है ये तो वहीँ जा के पता लगेगा.

नरूला साब बॉस के घर जाने में बड़ा झिझकते हैं. दो भारी समस्याएँ खड़ी हो जाती हैं - एक तो कौन सा गिफ्ट लेकर जाओ दूसरे श्रीमति को लेकर जाओ या नहीं? ये दोनों गंभीर मुद्दे काफी समय लेते हैं और खामखा की टेंशन देते हैं. पर जैसे ही श्रीमति से जिकर किया तो तपाक से उन्होंने तबियत साफ़ कर दी,
- तुम्हें तो फाइलों से कब फुर्सत मिलती है. कुछ सीख लो अपने बॉस से. मुझे मिसेज़ गोयल से सब पता लग गया है. उनका बेटा डेंटिस्ट का कोर्स कर चुका है शिकागो में और अब अगले महीने आने वाला है. कुछ समझे? चार लोगों में बात करेंगे इस बहाने उन्हें कोई अच्छा रिश्ता भी मिलेगा. तुम्हारा बॉस दूर की सोच रखता है तुम्हारी तरह फाइलों में नहीं घुसा रहता. कुछ समझे?

समझे तो जाकर पार्टी में. बॉस ने बियर के साथ चियर्स किया और कहा,
- अब तो डेंटिस्ट बन ही गया है हमारी चिंता दूर हुई. पर भई बचपन में बड़ा ही नटखट था और पढ़ाई से दूर भागता था. कई बार पिटते पिटते बचा. चलो खैर अंत भले का भला. एन्जॉय!
- और नरूला साब किसी ब्रांच से लोन की बात कर लो. साहबजादे को क्लिनिक भी तो बनवा के देना है. दो चार मशीन लगेंगी कुछ फर्नीचर वगैरा लेना होगा बस 25 लाख के आस पास का लोन काफी रहेगा. अभी तो एक दो महीने लगेंगे इतने फाइल तैयार करवा देना.
- सर सारा झुमरी तलैय्या रीजन आपका है. आप तो बस आदेश करें. आपके बेटे का काम सेकंड्स में होगा सर सेकंड्स में. मैं कल ही जैसवाल को फोन कर देता हूँ आके पेपर ले जाएगा. नो प्रॉब्लम सर नो प्रोब्लम.
जैसवाल जी सीनियर मैनेजर हैं शहर की ब्रांच के. बाल और दाढ़ी सफ़ेद हो चुकी है. बस केवल चार महीने रह गये थे रिटायर होने में. उन्होंने सोचा लोन तो सेफ है जाते जाते कर ही देता हूँ. लड़का आए तो लोन के कागज़ साइन करा कर चेक पकड़ा देंगे और फिर बाय बाय कर देंगे. बुढ़ापे में दांत तो गिरने ही हैं यहीं आ जाया करेंगे - 'ले बेटा मैंने तुझे लोन दिया था अब तू मुझे दांत दे दे!'

जैसवाल जी की ब्रांच के पास ही क्लिनिक तैयार हो रहा था. अगले महीने साहबजादे भी आ गए और क्लिनिक में आ बैठे हालांकि अभी मशीन आनी थी. साहबजादे को कोई इंडियन मशीन पसंद नहीं आ रही थी कभी अमरीका से मंगवाना चाहता था तो कभी ताइवान से. बैंक से लोन की पेमेंट भी रुकी हुई थी. इस बारे में जैसवाल जी अपनी देसी भाषा में पूछते तो जवाब में साहबजादे अमरीकी इंग्लिश में जवाब देते. जैसवाल जी ने सोचा छोड़ो क्या बात करनी है इस अंग्रेज से, जब ये मशीन पसंद कर लेगा तो पेमेंट कर देंगे.

लेकिन बात तो करनी पड़ गई वो ऐसे कि सन्डे शाम जैसवाल जी ने शौक से चिकेन बिरयानी खाई पर टंगड़ी दांत में अटक गई. दांत में दर्द होने लगी और सारे घरेलु नुस्खे फेल हो गए. रात के दस बजे क्या करें? फिर याद आया तो अंग्रेज साहबजादे को फोन लगाया. समझाना मुश्किल हो रहा था पर किसी तरह 20 मिनट की गुफ्तगू के बाद कागज़ पर दवाई नोट की और बेटे को दौड़ाया बाज़ार. 11 बजे कैप्सूल खाकर लेट गए. 11.30 बजे हड़कंप मच गया. जैसवाल जी का चेहरा सूज गया और रंग लाल हो गया. दवाई का रिएक्शन हो गया. 12 बजे नर्सिंग होम में दाखिल हो गए. दो दिन वहां रहे, तीसरे दिन घर में आराम किया और चौथे दिन ब्रांच पहुंचे. सीट पर बैठते ही नरूला साब को गुस्से में फोन लगाया.
- अबे नरूला ये किस बेवकूफ डेंटिस्ट की लोन फाइल मुझे भेज दी? हैं? मरते मरते बचा हूँ इसकी दवाई से. हैं? इस स्साले साहबजादे ने डेंटिस्ट का कोर्स किया है या डंगर डॉक्टर का? हैं? इसे तो मैं एक पैसे का लोन ना दूँ. फाइल वापिस भेज रहा हूँ बता देना आर.एम. को. ये भी पूछ लेना कि साहबज़ादा है या हरामज़ादा है? 

दांतों का ध्यान रखें    

  
Post a Comment