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Wednesday, 25 May 2016

ऑडिटर आया

चीफ साब ने ब्रांच के सभी अफसरों और मैनेजरों को केबिन में बुला लिया और मुखातिब हुए,
- भई 31 मार्च गई और अब ऑडिटर आया समझो. ये लैटर आ गया है और मैंने फ़ोन पर बात भी कर ली है. दिल्ली से कोई गोयल साब आ रहे हैं. बात करने से लग रहा था की अनुभवी हैं और धर्मपत्नी भी साथ आ रही हैं. मलिक साब आप तो ज़रा होटल वगैरा सेट करा दो. साथ में तीन जूनियर भी हैं उनका हिसाब किताब भी देख लेना. होटल वाले को बता देना बिल ऐसे बनाए ताकि उनकी लिमिट में ही काम हो जाए. लंच तो यहीं करेंगे दिन में उसके बिल तो ब्रांच खाते में ही जाने हैं देख लेना. आने जाने के लिए मेरी गाड़ी रहेगी. बाकी सब लोग नोट कर लो कि उनसे मौसम और झुमरी तल्लिय्या की खूबसूरती का व्याख्यान कर लेना पर बैंकिंग की बात नहीं करनी है समझ गए न ?

- और नरूला साब असली ऑडिट तो आपका लोन विभाग का ही होना है. इसलिए ज़रा कमर कस लो और घर बोल दो की सन्डे तो गया. कारपेट की फैक्ट्री में एक बढ़िया सा आइटम निकलवा कर पैक करवा लो. एक कोई घरेलू आइटम मैडम गोयल के लिए भी रखवा देना. पर बजट ज़रा सा डिस्कस कर लेना. शाम के लिए दो एक बोतलें भी चाहिए होंगी. बीच में एक दिन गंगा स्नान करने जाएंगे गोयल साब वो मैं अपनी गाड़ी में ही मैनेज कर लूँगा. तीन खाते ढीले हैं ज़रा वो संभाल लेना बाकी मैं अपने लेवल पर तो करूँगा ही. ज़रा ध्यान रखना कि पेन पेंसिल वगैरा की दिक्कत ना हो उन्हें. और कुछ ?

मीटिंग बर्खास्त हुई और तैयारी शुरू हो गई. गोयल साब आ गए और ऑडिट चालू हो गया. शाम को नरूला साब बोतल लेकर होटल के रूम में पहुंचे. घंटी मारी तो गोयल साब ने दरवाज़ा खोला.
- आओ आओ बैठो. बस पांच मिनट लूँगा ज़रा पूजा कर लूं.
नरूला साब ने देखा की पूरे कमरे में अगरबत्ती का धुआं फैला हुआ था. गोयल साब पजामे और बनियान में फर्श पर आलथी पालथी मार कर बैठे हुए नम नम नम नम कुछ बोल रहे थे. सामने थाली में 2 छोटी छोटी मूर्तियाँ रखी हुईं थीं साथ में फूल, धूप और अगरबत्ती थी और एक चांदी का सिक्का रक्खा था. फिर खड़े होकर थाली हाथ में लेकर कमरे में चहुँओर घुमाया और फिर सोफे में बैठ गए. बोतल देखकर बोले,
- अरे रे रे नरूला साब वैसे तो मैं पीता नहीं पर अगर पीता हूँ तो सिर्फ स्कॉच. ये देसी रोयल फोयल मैं नहीं लूँगा प्लीज. अगर अच्छी सी स्कॉच मिल सकती है तो ठीक है वरना कोई बात नहीं. पीना कोई जरूरी थोड़ा ही है ?

नरूला साब ने पूरे झुमरी तल्लिया शहर में घोड़े दौड़ा दिए. ये तो इज्ज़त का सवाल था, नौकरी का सवाल था. पर अंत में खोज ही लाये जोनी वाकर. दो पेग तैयार हो गए. गोयल साब ने चियर्स करने से पहले अपने गिलास में ऊँगली डुबोई और कुछ नम नम नम नम करते हुए हवा में छिड़क दी. फिर दूसरी बार और फिर तीसरी बार भी ऐसा ही किया. उसके बाद गिलास टकराए और चियर्स कहा. नरूला साब के पूछने पर बताया,
- देखो नरूला साब ऐसा करने का एक कारण है. भगवान ने इतनी सुंदर सी ये दुनिया बनाई है और यहाँ भांत भांत की खाने पीने की सुंदर चीज़ें भी बनाई हैं. एक से बढ़ कर एक फ्रूट और सब्जियां हैं. पर ये जो है ना दारु इसे पीना भगवान अच्छा नहीं मानते. पर साब कभी कभी तो लेनी भी पड़ती है ना. क्यूँ नरूला साब ? अब आप इतनी दौड़ धूप कर के लाएं भी और फिर भी हम ना पियें तो गुस्ताखी होगी ! हहहाहा ! और ये जो मैंने गिलास में से छिड़काव किया था ये भगवान से माफ़ी मांगी थी एक्चुली.

ऑडिटर साब और उनकी मैडम ने गंगा स्नान भी किया, झुमरी के आस पास की सैर भी की, स्कॉच भी पी और रिपोर्ट भी ठीक ठाक दे गए. अब अगले साल देखा जाएगा क्यूँ जी ?

सुंदर सी दुनिया 


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