Pages

Tuesday, 10 May 2016

म्हारे साब

साब जी क्या पूच्छो जी. पक्की नौकरी करी पूरे 36 साल अर पांच साल करी कच्ची. इब तो पेंसन के मजे ले रे जी. नौकरी में हर तरह के दिन देख लिए साब जी उजले भी अर घनेरे भी. बड़े बड़े अफसरान देखे जी दबंग देखे, निकम्मे देखे अर भगवान आपका भला करे जी दो रीजनल मैनजर जो हैं सो देखीं जी लेडीज. मैं आज बता रा जी सबकी सेवा करी जी इस नफे सिंह ने. कोई आरएम यो न कै सके अक नफे सिंह की डूटी में कमी रै गी. टैम से आणा अर टैम से जाणा, वर्दी म्हारी फिटफाट अर रायफल म्हारी चकाचक. आज भी कोई बैठा हो आरएम की कुर्सी पे जाते-ई पैले जयहिंद करूँ जी. फेर वो-ई नूं कहे अक नफे सिंह सब ठीक ठाक है ना? बालक राजी खुसी हैं ना? यो-ई कमाई है जी म्हारी तो और बाकी सुसरा क्या धरा दुनिया में साब जी.

इब कमाई की बात सुण लो. जब मैडम नरूला आरएम आई जभी म्हारे लग गया था की आरएम ऑफिस में कुछ घटना होगी. मैडम बड़ी सजधज के आवे थी. बढ़िया सी साड़ी, खुसबू अर भारी जेवर. इस्टाफ की सारी लेडिज जब जेवर देखें जी तो नरूला मैडम भोत खुस हो जाए थी. लेट-ई तो आणा आफिस अर लेट-ई तो जाणा घर. चार बजे तो फाइलें अलमारी ते बाहर आवें थी जब दफतर हल्का हो ले था. अर लाणे वाले दो आदमी एक तो प्रापर्टी डीलर और दूसरा जी वो बर्तन की फक्ट्री वाला. कभी एक केबिन मैं बैठा कभी दूसरा अर कभी दोनों. कभी चाय आ-री जी कभी ठंडा. भगवान भला करे जी सबका काफी दिन मामला चला यो. फिर जाने शिकायत हो ली जाने क्या. पाछे पता पड्या की मैडम पे कारवाई हो ली और मैडम की तो नौकरी चली गई जी. आदमी भगवान से डरे ज्यादा न उछले जभी ठीक है जी.

ऐसे ई और एक आरएम आये थे जी गोयल साब. पुराणी बात है जी. सांवला रंग जी अर बाल कतई उड़-गे अर जी खा पी के गोल मटोल हो रए जी. महतो ड्राईवर बतावे था जी अक गाडी में सोडा, बर्फ, गिलास मौजूद रह वे था जी. थोड़े ई दिनां में सहर में मसहूर हो गया जी अक बोतल दो अर काम करा लो जी. एक आधी बेर लुगाई का नाम आया जी भगवान जाणे जी सांच बोलें थे या झूट. पर बुरा नतीजा होया जी. गोयल साब ने रात में सरकारी गाडी मार दी पेड़ में और राम नाम सत्त जी.

पर आप जाणो भले आदमी भी कम नां-ए दुनिया में अर दुनिया अब-लो निपट ना जाती? पर दो एक गलत मच्छली तलाब में कभी ना कभी टपक पड़ें जी. अर आप जाणों लालच तो गलत है ही. कबीर दास जी भी कै गए जी:

माया मरी ना मन मरा, मर मर गए सरीर,
आसा तृसना न मरी, कह गए दास कबीर !

पेंसन के मजे 


Post a Comment