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Tuesday, 22 March 2016

तीन ताले

हमारे दोस्त नरुला साब आजकल बड़े हलके फुल्के और खुश नज़र आते हैं. पिछले साल से बेटे के पास जाने का प्रोग्राम बन रहा है और अब तो टिकट भी आने वाला है. नरूला साब तैयारी में हैं की इस बार गया तो फिर वहीँ रहूँगा. फिलहाल जिस फ्लैट में वो रहते हैं उसको अच्छी तरह बंद करने के लिए तीन नए ताले भी ले आये हैं. तीनों बेडरूम पर भी ताले लगा देंगे. चाबियों का एक सेट साथ ले जाएंगे और एक सेट मित्तल साहब के पास रहेगा. नरूला साहब के वापिस ना आने की स्थिति में मित्तल साहब फ्लैट का ताला खोलेंगे और उस वक़्त शर्मा साहब और जोग साहब मौजूद रहेंगे. सामान की एक लिस्ट फ्रिज पर लगा दी गई है और फोटो कापियां तीनों दोस्तों को दे दी गई हैं.

नरूला जी की उमर 74 के पार हो चुकी है. किसी अच्छे जमाने में वो एक विदेशी एयरलाइन्स में 'होस्ट' थे. उन दिनों हवाई जहाज कम थे और 'एयर होस्टेस' तो और भी कम हुआ करती थीं. अपनी जवानी में नरूला साब ने दुनिया गोल साबित कर दी थी. दुनिया के किसी भी बड़े शहर का नाम लें तो नरूला साब फ़ौरन वहां का कोई किस्सा सुनाने के लिए तैयार हो जाते हैं. हिन्दुस्तानी तीन सितारा से लेकर सात सितारा होटल तो उनके लिए कोई मायने नहीं रखते. वो तो हमीं हैं जो मूर्थल के ढाबे के परांठे याद करते रहते हैं.

नरूला साब की स्वीटी काफी बरस पहले गुज़र गई थी शायद फिरंगी थी या शायद नहीं. कोई इस बारे में ठीक से नहीं जानता है ना ही नरूला साब उसका कभी जिक्र करते हैं. केवल अपने बेटे के बारे में कुछ प्यार से, कुछ गर्व से और कुछ घमंड से बात करते हैं. अक्सर उनके फोटो और विडियो दिखाते रहते हैं. बेटा स्विस स्कूल कॉलेजों में पढ़ा हुआ है और वहीं के एक शहर बर्न में बिजनेस करता है. अपना मकान भी है. फिरंगी बीवी है और नरूला साब का एक पोता भी है. चार साल पहले नरूला साब एक महीना वहां रह कर आए थे. बड़े चाव से वहां की बातें बताते थे. खूब घूमे, बढ़िया शराब पी और कई तरह की डिशेस का मज़ा लिया जिनका हमें नाम भी समझ नहीं आता. अपना तो देसी लंगर ही ठीक है!

यूँ तो नरूला साब साफ़ कपड़ों में चाक चौबंद रहते हैं पर साल भर से आँखों की कमजोरी और घुटने के दर्द से परेशान से रहते हैं. उन्हें उम्मीद थी की ये दोनों परेशानियां भी वहां ऑपरेशन कराके ठीक हो जाएंगी.

पर इस बार की हमारी सन्डे शाम की मीटिंग में नरूला साब बुझे बुझे से लगे. पेग लगा के भी रंगत नहीं आई. जब उनसे पूछा तो कहने लगे:
- यार मैं नहीं जा रहा बेटे के पास. रात उससे बात हुई थी. कहने लगा की आप यहाँ आ जाओ दोनों ऑपरेशन मैं करा देता हूँ. कोई दिक्कत नहीं है. अगर रहना चाहते हो तो उसके लिए मैंने ओल्ड ऐज होम भी देख लिया है. बस सिर्फ २० किमी ही है. मैंने कहा अरे यार पांच पांच बेडरूम का तेरा मकान है फिर तू क्यूँ दूसरी जगह देख रहा है. कहने लगा कि पापा आपको तो पता ही है कि यहाँ ऐसे रहने का रिवाज़ नहीं है. बहु भी नहीं मानेगी. फिर सन्डे के सन्डे मैं ओल्ड ऐज होम में मिलने आ जाऊँगा ना क्या दिक्कत है. पर मैंने मना कर दिया. पता नहीं ठीक किया या नहीं, इतना कहने के बाद नरूला साब चुप हो गए. सभी दोस्त चुप हो गए. वातावरण बोझल हो गया. कुछ देर की चुप्पी के बाद बोले:
- ज़रा बर्फ देना.

देसी माहौल 


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