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Tuesday, 4 August 2015

खजांची का बेटा

बैंक के अंदर प्रवेश करते ही बांये हाथ पर मेरा केबिन था. उससे लगा हुआ एक लम्बा काउंटर था और उसके बाद खजान्चियों के लिए तीन जालीदार केबिन बने हुए थे. आखरी केबिन में हेड कैशियर याने प्रधान रोकड़िया बैठता था. आप कभी मिले हमारे हेड कैशियर से या नहीं? तो मैं आपका परिचय करा देता हूँ.

हेड केशियर का नाम नागर मल था पर ज्यादातर स्टाफ के लोग उसे हेड पुकारते थे. 'हेड ये पेमेंट कर देना' वगैरा. गठा हुआ शरीर पर कद छोटा और रंग गोरा. नागर मल सिर में कोई सुगन्धित सा तेल लगा कर बाल पीछे की ओर कर के रखता था. उमर 60 के नजदीक थी पर बाल घने और बहुत कुछ काले थे. हर वक़्त मुंह में पान वो भी 300 नंबर तम्बाकू वाला रखता था. नागर मल के पान की एक ख़ास तरह की सुगंध आती थी जो मुझे तो गंध ही लगती थी और नापसंद भी थी. उसके होटों के दोनों कोरों में हमेशा लाली रहती थी. कभी कभी आँखों में सुरमा या काजल सी कोई चीज़ लगाता था. कई बार पूछने पर भी नागर मल ने काले रंग का राज़ नहीं बताया बस हंस कर टाल दिया.

इत्तेफाक से एक बार नागर मल ने घर में एक धार्मिक अनुष्ठान किया तो उसके घर जाने का मौका मिला. चावड़ी बाज़ार से गली चूड़ी वालान और उसके अंदर कोई और पतली गली. आगे आगे नागर मल चलता जा रहा था और गली मोहल्ले के इतिहास का व्याख्यान करता जा रहा था. मुझे लग रहा था कि कौन सी भूल भुलैया में जा रहें हैं? पता नहीं कभी इन गलियों में धूप भी आई थी या नहीं? उसकी भाषा भी ध्यान देकर समझनी पड़ती थी 'विसने कई' याने उसने कहा और 'आरिया' याने आ रहा हूँ. स्टाफ वाले उसका मज़ाक भी उड़ाते थे 'नागर मल ना आरिया ना जारिया खड़ा खड़ा मुस्करा रिया'.

घर में बेटे से मुलाकात हुई. पता लगा कि दसवीं पास करके खाली बैठा था और आदतें बिगड़ रहीं थीं. बेटा नागर मल की चिंता का विषय था. नागर मल ने दौड़ भाग कर के किसी तरह बेटे को भी बैंक में कैशियर लगवा दिया.

बेटे की नौकरी के बाद नागर मल संतुष्ट सा नज़र आता था. खास तौर से शनिवार के दिन कुछ ज्यादा ही तैयारी से ब्रांच में आता था. प्रेस किये हुए कपड़े और कुछ परफ्यूम भी. उड़ती उड़ती खबर पहुंची की नागर मल ने मुजरा देखना शुरू कर दिया था और शनिवार को जीबी रोड के कोठों पर जाना शुरू कर दिया था. पर इन बातों से मैनेजर को क्या लेना देना था और फिर काम में भी तो कोई शिकायत नहीं थी.

एक शनिवार शाम को नागर मल मुजरा देखने पहुंचा गया. चकाचक कपड़े, मुंह में पान की गिल्लोरी और जेब में नोट. गाने की धुन और घुंघरू की छन छन पर दरी पर बैठा मस्ती में सिर हिला रहा था. मुजरे के दौरान दरवाज़ा खुला तो नागर मल ने उत्सुकता वश कनखियों से दरवाज़े की ओर देखा. नागर मल की सांस रुक गई और शरीर ठंडा पड़ने लगा. बेटे को अंदर आता देख कर घबराहट से आँखों के आगे अँधेरा छा गया. कुछ पलों बाद संभला और तेज़ी से चोर दरवाज़े से बाहर हो गया.

बाहर निकल कर नंगे पैर जाने कब तक इधर उधर भटकता रहा. फिर दिल्ली स्टेशन पर जा कर एक बेंच पर लुढ़क गया. क्रोध, ग्लानि और शर्म से उसका सिर घूम रहा था. बहुत देर ऐसे ही पड़ा रहा और फिर सिसकने लगा. आंसू निकल आये मन कुछ हल्का हुआ तो वो हरिद्वार जाने वाली गाड़ी में बैठ गया.

महीने भर तक परिवार और पुलिस को उसका कोई सुराग नहीं मिला. एक दिन मैं ऑफिस में लेट बैठा हुआ था की फोन बजा. नागर मल ने अपनी कथा और व्यथा सुनाई. उसके कहे अनुसार अगले दिन उसकी पत्नी को बुलवा कर खाते से पैसे दे दिए और दोनों की बात भी करा दी. बेटे की शादी करने के बाद पत्नी भी नागर मल के पास हरिद्वार चली गई.

पिछले कई सालों से नागर मल से संपर्क नहीं हुआ.

जीवन धारा 



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