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Friday, 27 February 2015

गुप्तकाशी

गुप्तकाशी रूद्रप्रयाग ज़िले का एक हिस्सा है और लगभग 1320 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। हरिद्वार - रूद्र प्रयाग के रास्ते केदारनाथ जाने वाले यात्रियों का गुप्तकाशी एक पड़ाव है।

गुप्तकाशी का समबन्ध पांडवों से जुड़ा हुआ है। और इस के नाम पर एक कहानी भी प्रचलित है की महाभारत के युद्ध के बाद कृष्ण ने पांडवों से कहा कि वे युद्ध में उनके द्वारा मारे गए परिजनों और ब्राह्मणों की हत्या से मुक्त होने के लिए शिव का ध्यान करें। परन्तु शिव युद्ध मे हुई कई घटनाओं से नाराज़ थे और पांडवों से नहीं मिलना चाहते थे। शिव ने नंदी का रूप धारण कर लिया और पहाड़ों की ओर प्रस्थान कर गए। पर पांडव पीछा करते रहे। एक दिन गुप्तकाशी में भीम ने नंदी को पिछले पैरों और पूँछ से पकड़ लिया। लेकिन नंदी तुरंत अंतरध्यान या गुप्त हो गए। इसी कारण इस जगह को गुप्तकाशी कहा जाता है।

पर बाद में शिव पाँच अलग-अलग रूप में प्रकट हुए - केदारनाथ में कुब या कूबड़, रूद्र प्रयाग में मुख, तुंगनाथ में भुजाएँ, मध्यमहेश्वर में मध्य भाग और कल्पेश्वर में जटाऐं। 

गुप्तकाशी से बर्फ़ से ढका चौखम्बा पर्वत बड़ा ही सुंदर लगता है। यह हिमालय का वह भाग है जहाँ गंगोत्री ग्लेशियर है और जहाँ से से मंदाकिनी का उद्गम होता है। चौखम्बा बद्रीनाथ के पश्चिम में स्थित है। 

होटल की बालकनी से लिए गए कुछ चित्र प्रस्तुत हैं:






बर्फ़ से ढका चौखम्बा पर्वत जो की गंगोत्री ग्लेशियर के ऊपर स्थित है 


नीचे घाटी में बहती मंदाकिनी


चौखम्बा - इसके चार कोनों की ऊँचाई इस तरह से है: 7138, 7070, 6995 और 6854 मीटर

गुप्तकाशी का एक मनोरम दृश्य 

गुप्तकाशी का एक और दृश्य - बढ़ती आबादी और बेतहाशा निर्माण 

घाटी के दूसरी ओर देखिए मूसलाधार बारिश के बाद हुए भूस्खलन के निशान 

नई दिल्ली से हरिद्वार होते हुए गुप्तकाशी का रास्ता 417 किमी





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