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Friday, 23 January 2015

नंदी बैल

नंदी बैल भगवान शिव के वाहन हैं। बैल में शक्ति है, बैल कर्मठ है और बैल भरोसे लायक है पंगे कम करता है। भगवान शिव के मंदिर के सामने डटा रहता है। दक्षिण भारत के कई मंदिरों में नंदी की बड़ी बड़ी मूर्तियों हैं। लीपाक्षी, आंध्रा में नंदी की सबसे बड़ी मूर्ति बताई जाती है। 

पर नंदी की सुंदर मूर्तियों की बात छोड़ दें तो ज़िंदा बैलों की हालत ज़्यादा अच्छी नहीं है। बैलों का उपयोग प्राचीन समय से पूरे भारत और लगभग पूरे विश्व में खेती और माल ढुलाई के लिए किया जा रहा है। गरमी हो या ठंड या बारिश, नंदी बैल जुता ही रहता है। खाने का तो पता नहीं पर डंडे ज़रूर खाता रहता है। भारत के विभिन्न स्थानों में ली गई कुछ फ़ोटो प्रस्तुत हैं:

मीनाक्षी मंदिर, मदुरै में नंदी की मूर्ति। नंदी के कान में बात कहने से आपकी मनोकामना पूरी होगी !

रिम झिम में किसान और उसके हीरा मोती खेतों की ओर। बेलूर, कर्नाटक में लिया गया फ़ोटो। दक्षिण भारत में बैलों के सींग लम्बे , नूकीले और घुमावदार हैं

नंदी माल ढुलाई में। मदुरै शहर, तमिलनाडु के क़रीब लिया गया फ़ोटो 

हीरा मोती और धान की बुआई की तैयारी। हम्पी, कर्नाटक में लिया गया चित्र 


बैल, बैलगाड़ी, चालक और मोबाईल फ़ोन। मेरठ में लिया गया फ़ोटो

केदारनाथ मंदिर के सामने चबूतरे पर नंदी की मूर्ति 





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