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Saturday, 17 May 2014

चलते चलाते

भारत की सड़कों पर चलते चलाते आपको छोटी बड़ी गाड़ियों पर कई तरह के नारे लिखें हुए मिलेंगे, चित्र बने होंगे या पोस्टर चिपके मिलेंगे । कुछ को पढ़ कर मुस्कराहट आ जाती है, कुछ को देख कर अनदेखी कर देते हैं और कभी हँसी भी आ जाती है । कुछ तो आम हैं जैसे की ' गुल्लू ते पप्पू दी गड्डी, माँ का आशीर्वाद, ok, tata, आवाज़ दो, होरन दो ' । कभी कभी कोई नई चीज़ भी दिखाई पड़ जाती है । कमरशियल गाड़ियों में ये चलन ज़्यादा है ।

नीचे दी हुई सभी तस्वीरें मोबाइल फ़ोन से कार के अन्दर से चलते चलते ही ली गईं हैं । हो सकता है बहुत बढ़िया न आई हों । चलती कार में से दूसरी चलती गाड़ी की तस्वीर कई बार अधूरी या धुंधली रह जाती है । ध्यान तो नारे या गाड़ी पर बने चित्र की फोटो लेने में रहता है परन्तु गाड़ी आगे पीछे हो जाती है ।  परन्तु मज़ा भी तो नारे पढ़ने या चित्र देखने में ही है । 

कुछ फ़ोटो प्रस्तुत हैं:


बंदे ने घोषणा कर दी है की झूले लाल जी के आशीर्वाद से वह चिंता मुक्त हो गया है


ट्रकों के चित्रकारों को बाबा भोले नाथ के चित्र बहुत प्रिय हैं । बहुत से गाड़ियों पर ऐसे चित्र मिलेंगे 


वाह पेंटर ने बड़ा ही शानदार नारा लिख दिया है नेता लोग मेहरबानी कर के इस पर ध्यान दें


दो बढ़िया से नारे लिखें हैं इस गाड़ी पर । परन्तु सोचने वाली बात है की ईमान कितने लोगों की दौलत है ?




ज्यादातर ड्राइवर इस तरह की गाड़ी को टैंकी कहते हैं और शायद गाड़ीवान को इस टैंकी से ज़्यादा प्यार है 


कोई दिलजला पेंटर रहा होगा । एक सिरे से गर्ल फ़्रेंड, पत्नी और पूरी औरत जात को ही मीठी ज़हर कह दिया
 !


रेलवे कोच, लक्ज़री कोच तो आपने सुनी ही होंगी और अब पेश है एक दूसरी तरह की कोच 


गोरी तो गोरी है गाँव की हो या शहर की हो । दूसरी बात ये है की धीरे चलो पर एक अच्छा नारा लिख दिया है जिस पर तेज़ गाड़ी चलाने वालों को ध्यान देना चाहिए  


बजा होरन निकल फ़ौरन लिख तो दिया पर रास्ता तभी मिलेगा जब ड्राइवर का मूड बनेगा


पेंटर को 'जूते' शब्द लिखना मुश्किल लगा पर जूते की तस्वीर बनानी आसान लगी ! 


पुराना खिलाड़ी है भई जो पगली को प्यार से समझा रहा है


सांई के दरबार में बड़ी सही दरख्वासत लगाई है !


हाँ जरूर मिलेंगे !


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